यमुनानगर की गीता चौहान सुबह पांच बजे घर से पीजीआई के लिए निकलीं। साढ़े सात बजे पीजीआई पहुंची और सीधे स्किन डिपार्टमेंट में ब्लड की रिपोर्ट लेने पहुंच गईं। वहां पता चला कि उनकी रिपोर्ट रिसर्च ब्लॉक ए में है।
जब वे वहां गईं तो उन्हें जानकारी दी गई कि आपकी ब्लड रिपोर्ट न्यू ओपीडी के ग्राउंड फ्लोर पर काउंटर नंबर चार से मिलेगी। वे नौ बजे काउंटर में पहुंच गई। भीड़ इतनी थी कि उन्हें रिपोर्ट लेने में दो बज गए। गीता कहती हैं कि पीजीआई का सिर्फ नाम है।
जमीनी स्तर पर आम मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं है। यह कहानी सिर्फ गीता की नहीं, बल्कि पीजीआई में आने वाले उन हजारों मरीजों की दास्तां है, जो रोजाना अपनी ब्लड रिपोर्ट के लिए न्यू ओपीडी पहुंचते हैं।
पीजीआई कंप्यूटराइजेशन का एक सच यह भी है। साल 2012-13 की आडिट रिपोर्ट पहले ही इसका सच उजागर कर चुकी है। पीजीआई का कंप्यूटराइजेशन तीन चरणों में साल 2009 में पूरा होना था, लेकिन अब तक सिर्फ नाम मात्र का काम हुआ है।
इस तरह से परेशान किया जाता है मरीजों को
1. न्यू ओपीडी के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित काउंटर नंबर चार में बायोकेमेस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी और हीम्टोलॉजी की रिपोर्ट दी जाती है।
2. यदि तय समय पर रिपोर्ट आ गई तो काउंटर नंबर चार से मिल जाएगी। लाइन में कम से कम चार से पांच घंटे का समय लगेगा।
3. यदि रिपोर्ट नहीं आई तो मरीज को रिसर्च ब्लॉक एक में भेज दिया जाता है। यदि वहां रिपोर्ट मिल गई तो ठीक है, वरना मरीजों को कह दिया जाता है कि रिपोर्ट आपको डिपार्टमेंट से मिल जाएगी।
4. डिपार्टमेंट में भी यदि रिपोर्ट नहीं मिली तो मरीज को फिर से काउंटर नंबर चार पर ही लाइन में लगना होता है। इतने चक्कर लगाने में मरीज व उनके परिजनों की सांस फूलने लगती है।
सिर्फ बायोकेमेस्ट्री लैब की रिपोर्ट इंटरनल सर्वर पर
कंप्यूटराइजेशन के नाम पर पीजीआई में अब तक सिर्फ बायोकेमेस्ट्री लैब की रिपोर्ट इंटरनल सर्वर पर पहुंच पाई है। काउंटर नंबर पर चार बैठे कर्मी मरीजों के सीआर नंबर डालते हैं और रिपोर्ट का प्रिंट निकालकर मरीज को दे देते हैं, लेकिन इसका फिलहाल मरीजों को रत्ती भर भी फायदा नहीं मिल रहा। मरीजों को लाइन में लगकर ही रिपोर्ट लेनी पड़ती है। प्लानिंग थी कि यह रिपोर्ट सीधे डाक्टरों के पास पहुंचा दी जाए, ताकि मरीजों को लाइन में न लगना पड़े, लेकिन रिपोर्ट के लिए मरीजों को लाइन में ही लगना पड़ रहा है। रिपोर्ट के लिए चार घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है मरीजों को।
मेरी बेटी का एक्सीडेंट हुआ है। उसका इलाज पीजीआई में चल रहा है। मैं सुबह दस बजे आ गई थी। पूरे चार घंटे हो गए हैं, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं मिली। खड़े-खड़े मेरे पैर दर्द करने लगे।
मूर्ति देवी, निवासी सेक्टर-25
रिपोर्ट के लिए कभी रिसर्च ब्लॉक ए पर भेजते हैं तो कभी डिपार्टमेंट। यदि रिपोर्ट का एक ही काउंटर और समय फिक्स कर दिया जाए तो परेशानी नहीं आएगी। मैं थककर पूरी तरह से चूर हो चुकी हूं।
गीता चौहान, निवासी यमुनानगर
पीजीआई के कंप्यूटर सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। किसी भी नई चीज को शुरू करने में थोड़ा तो वक्त लगता है। कोशिश है कि जल्द ही यह सिस्टम शुरू कर दिया जाए।
मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई