पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के निधन से पंजाब में शोक की लहर है। वह 94 साल के बाद भी राजनीतिक रूप से सक्रिय थे। उनके निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शोक जताया है। वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल का सभी राजनीतिक दल सम्मान करते थे। उनका जन्म 8 दिसंबर को गांव अबुल खुराना में हुआ था।
प्रकाश सिंह बादल ने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में राजनीति की शुरूआत की थी। उन दिनों वह लाहौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई करते थे। 1947 में महज 20 साल की उम्र में प्रकाश सिंह बादल ने पहली बार सरपंच का चुनाव जीता था। वहीं 1957 में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की टिकट पर पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था।
प्रकाश सिंह बादल 10 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। पंजाब की राजनीति में उन्हें बाबा बोहड़ कहा जाता था। अगर 1992 के चुनाव को छोड़ दे तो वह 1969 से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं। 1992 में अकालियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था। पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बन उन्होंने एक नया कीर्तिमान रचा था।
प्रकाश सिंह बादल कई बार जेल जा चुके हैं। उन्होंने हमेशा पंजाब के हक में आवाज उठाई। इंदिरा गांधी ने जब देश में आपातकाल लगाया था तब प्रकाश सिंह बादल ने इसका विरोध जताया था। 80 के दशक में प्रकाश सिंह बादल नदियों के पानी को लेकर जेल गए। वहीं एक बार संविधान की काफी फड़ने पर भी उन्हें जेल जाना पड़ा था। मगर बाद में उन्होंने इस पर माफी मांगी थी। 1975 से 1977 तक प्रकाश सिंह बादल को कई बार जेल जाना पड़ा था।
आखिरी चुनाव में मिली हार
2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रकाश सिंह बादल ने लंबी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। मगर आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी गुरमीत सिंह खुड्डियां ने उन्हें 11,396 मतों से हरा दिया था। जबकि 2017 विधानसभा चुनाव में प्रकाश सिंह बादल ने अपने प्रतिद्वंदी कैप्टन अमरिंदर सिंह को 22,770 मतों से हराया था। उन्होंने 94 साल की उम्र में अपना आखिरी चुनाव लड़ा था। मगर हार का सामना करना पड़ा था।