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मातृ दिवस: कोरोना काल में ये माताएं बनीं मिसाल...अपनों को छोड़ परायों की कर रहीं देखभाल

रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Updated Sun, 09 May 2021 04:11 AM IST

सार

पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल के कोविड वार्ड की इंचार्ज आईएएस सुरभि मलिक ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप कारण वह दिन में 12 से 14 घंटे ड्यूटी कर रही हैं। मरीजों की बढ़ी संख्या के कारण कोई छुट्टी भी नहीं मिल पा रही है। 
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कोरोना मरीजों की सेवा में जुटीं ये माताएं। - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

कोरोना काल में लोग अपने घर से बाहर निकलने में डरते हैं लेकिन कुछ मां ऐसी भी हैं जो अपने बच्चों से दूर कर्तव्य का पालन कर कोरोना मरीजों की सेवा में जुटी हैं। इन माताओं ने बच्चों को अपने आप से दूर रखा है ताकि संक्रमण उन तक न पहुंचे। वहीं कुछ माताएं देर रात घर पहुंचती हैं। इस वजह से वह अपने बच्चों से मिल भी नहीं पाती हैं। लेकिन इन इस बात का मलाल नहीं है, उन्हें तो बस एक ही धुन है कि उनके मरीज ठीक होकर घरों को लौटे। साथ ही उम्मीद है कि यह बुरा दौर जल्द निकल जाएगा।


पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल के कोविड वार्ड की इंचार्ज आईएएस सुरभि मलिक ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप कारण वह दिन में 12 से 14 घंटे ड्यूटी कर रही हैं। मरीजों की बढ़ी संख्या के कारण कोई छुट्टी भी नहीं मिल पा रही है। 


कई बार रात को घर पहुंचने में 10 बज जाते हैं। तब तक उनकी तीन साल की बेटी सो जाती है। बेटी शिकायत भी करती है। लेकिन किसी तरह उसे समझाती हूं। साथ ही कहा कि इस समय केवल मरीज ही उनकी प्राथमिकता हैं, जो बीमार होने साथ कोरोना की इस दूसरी लहर से काफी सहमे हैं। हालांकि वह पूरी सावधानी बरतती हैं और वैक्सीनेशन भी करा लिया है लेकिन फिर भी संक्रमण का खतरा तो रहता ही है। ऐसे में पारिवारिक सदस्यों से मिलना भी एक चुनौती है। उम्मीद करती हूं कि यह वक्त जल्दी निकल जाएगा। 
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डॉ. राजवंत कौर राजिंदरा के कोविड वार्ड में मरीजों के खाने-पीने से लेकर उनकी हर तरह की समस्या का खुद ध्यान रख रही हैं। उन्होंने माना कि गरमी में पीपीई किट पहनने से मुश्किल होती है लेकिन मरीजों के दर्द के आगे यह कुछ भी नहीं है। डॉ. राजवंत ने कहा कि मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं तो डॉक्टरों व बाकी स्टाफ के चेहरे पर खुशी आ जाती है। 

उन्होंने कहा कि उनके छह साल और तीन साल के दो बेटे हैं। रात को अक्सर घर पहुंचने में 10 बज जाते हैं। पति पूरी तरह से सपोर्ट कर रहे हैं। लेकिन बच्चे शिकायत करते हैं। खास तौर से छोटा बेटा उनके बगैर खाना सही तरह से नहीं खा रहा है।  

राजिंदरा में कोविड मरीजों की देखरेख में लगी स्टाफ नर्स अकविंदर कौर ने बताया कि शिफ्ट वाइज तीन-तीन घंटे पीपीई किट पहन कर उन्हें कोविड मरीजों की देखरेख करनी पड़ती है। इस दौरान बाथरूम जाने या फिर कुछ भी खाने में दिक्कत होती है। कई बार पीपीई किट से त्वचा पर रैश भी पड़ जाते हैं। साथ ही बताया कि वह पिछले 15 दिनों से अपने दो साल के बेटे से नहीं मिल पाई। संक्रमण के डर से बेटे को अपनी मम्मी के घर छोड़ रखा है। साप्ताहिक अवकाश पर ही बेटे को देखने जाती हूं। अकविंदर ने कहा कि बस अब उम्मीद है कि यह महामारी जल्द खत्म हो। 
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एक अन्य स्टाफ नर्स जश्नप्रीत कौर ने बताया कि वह अपनी डेढ़ साल की बेटी को छोड़कर ड्यूटी दे रही हैं। तीन-तीन घंटे पीपीई किट पहनने से मुश्किल तो होती है लेकिन संतुष्टि है कि वह मरीजों की सेवा कर रही हैं। घर में बुजुर्ग माता-पिता को भी उन पर गर्व है। 

थाना इंचार्ज कर रही हैं गरीबों की मदद 
थाना सब्जी मंडी की इंचार्ज प्रियांशु सिंह एक तरफ कोरोना वॉरियर के रूप में जहां लोगों को इस महामारी के प्रति जागरूक कर रही हैं, वहीं गरीबों की मदद भी कर रही हैं। कोरोना की पहली लहर में भी प्रियांशु सिंह ने लॉकडाउन के दौरान गरीब लोगों की काफी मदद की थी। खास तौर से उन्होंने गरीब लड़कियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए थे। इस बार कोरोना की दूसरी लहर में भी वह गरीबों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। प्रियांशु सिंह ने बताया कि जो लोग लापरवाही करते हुए कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्ती बरतने में भी वह पीछे नहीं हट रही हैं। 

गरीब बच्चों की आर्थिक मदद कर रही हैं शिक्षिका पूनम गुप्ता  
सरकारी मिडल स्कूल खेड़ी गुजरां हेड डॉ. पूनम गुप्ता इस कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी हर तरह से मदद भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के पास मोबाइल रिचार्ज कराने को पैसे नहीं होते हैं, उन्हें पैसे देकर मदद की जाती है। जबकि कोरोना कारण घरों में पैसों की तंगी के चलते जो बच्चे डिप्रेशन में चले गए हैं, उनकी मदद के साथ-साथ काउंसलिंग करके उनकी मानसिक हालत में सुधार लाने की कोशिश में जुटी हैं। मिड डे मील के लिए आए राशन के सामान को गरीब बच्चों के घरों में पैकेट बनाकर पहुंचाया जा रहा है, क्योंकि कोरोना के कारण इन दिनों स्कूल बंद हैं।
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