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न सुन पाती है, न ही बोल पाती है, मां से समझकर 84 फीसदी अंकों संग किया स्कूल टॉप

Thu, 16 Jul 2020 12:24 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पलक अपने माता-पिता के साथ।
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16 साल की पलक उन तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो परेशानियों से हारकर टूट जाते हैं। पलक जन्म से न तो सुन सकती है और न ही बोल पाती है। ऐसी तमाम मुश्किलों से लड़ते हुए पलक ने सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में 84.2 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। यही नहीं स्कूल में सबसे ज्यादा नंबर उसी के हैं। चंडीगढ़ सेक्टर-20 बी स्थित गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा पलक की कामयाबी में उनकी मां का अहम रोल है।

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सुनने व बोलने की क्षमता न होने की वजह से उनका कोई ट्यूशन टीचर नहीं था। मां ही टीचर हैं। परीक्षा के वक्त मां ही उसे रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाती थीं। पलक की मां रेनू के मुताबिक, उनकी बेटी को 90 फीसदी से ऊपर हियरिंग लॉस है। मशीन के बावजूद उसमें सुनने की क्षमता नहीं के बराबर है। आमतौर पर ऐसे बच्चों को कुछ भी सिखाना और समझाना बहुत मुश्किल होता है लेकिन रेनू को ज्यादा मुश्किल नहीं आई। पलक जब दो साल की थी तभी उन्होंने स्पीच थैरेपी की ट्रेनिंग ले ली ताकि बेटी के हाव-भाव को आसानी से समझ सकें।  

रेनू ने बताया कि पलक को लिखकर या कई बार तो किसी चीज से जोड़कर उसे समझाना पड़ता था। यदि उसे कोई चीज समझ में आ जाए तो वह उसे बहुत ही अच्छी तरह से करती है। स्कूल में भी टीचरों ने उसका बहुत सहयोग किया। पलक के पिता सेक्टर-17 बैंक ऑफ महाराष्ट्र में अधिकारी हैं। 
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उन्होंने पलक को बताया कि उसका रिजल्ट आया है और उसे 84 फीसदी से ज्यादा अंक मिले हैं। पिता की यह बात सुनते ही पलक खुशी से चहक उठी। पलक का पेंटिंग व ब्यूटीशियन में काफी लगाव है। आगे वह इसी दिशा में करिअर बनाना चाहती है। रेनू ने बताया कि पलक की सफलता में उसकी स्कूल प्रिंसिपल (रिटायर्ड), मनीता सहगल, क्लास टीचर शिवानी, टीचर सारिका, अंशु जैन, अनीता, मोनिका, सुखविंदर व स्मृति का खास रोल रहा है। संस्था ‘प्रयास’ स्पीच थैरेपी की टीचर गोविंद कौर का भी उन्होंने धन्यवाद किया है।

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