1984 में हुए दंगों का दर्द आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। इस मामले में दोषी सज्जन कुमार को हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा होने के बाद यह दर्द फिर जग गया। 1984 में हुए दंगे में पंजाब के नवांशहर के 12 लोगों की जान चली गई थी। दंगा पीड़ित नवांशहर के स्लोह रोड निवासी गुरइकबाल सिंह भट्टी ने बताया कि इन दंगों में उनके बड़े भाई की जान गई थी। उनके भाई सुरिंदर सिंह दिल्ली में ट्रक लेकर गए थे।
वहां दंगाईयों ने उनके गले में टायर डालकर आग लगा दी थी। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला आने में बहुत देर लगी। इसके अलावा दंगा पीड़ित जागीर कौर ने अन्य आरोपियों को भी जल्द सजा दिए जाने की मांग की। इन दंगों में लधाना झिक्का निवासी जोगा सिंह, सुरिंदर सिंह, बहराम निवासी अमरीक सिंह, जींदोवाल निवासी जोगिंदर सिंह, करियाम निवासी हरी सिंह, सुरिंदर सिंह, मोहल्ला फतेह नगर निवासी जोगा सिंह, सूरापुर निवासी प्रीतम सिंह, उड़ापड़ निवासी पाल सिंह, चाहल (बलाचौर) निवासी गुरबचन सिंह, महितपुर उलधनी निवासी ज्ञान सिंह और चणकौआ निवासी प्रेम सिंह का परिवार प्रभावित हुआ था।