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कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, किसान बोले- आंदोलन जारी रहेगा, पढ़ें- पंजाब की सियासी प्रतिक्रियाएं

Wed, 13 Jan 2021 01:30 AM IST
ajay kumar अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
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किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पंजाब के राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। शिरोमणि अकाली दल ने किसानों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश को केंद्र की भाजपा सरकार की नैतिक हार बताया है। शिअद नेताओं ने चिंता व्यक्त की कि सरकार जानबूझकर भाड़े के आतंकवादियों को उनके खेमे में भेजकर किसानों के शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष में घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है, ताकि संघर्ष को बदनाम किया जा सके। कोर कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि हम यहां शांति को खराब करने वाले किसी भी प्रयास को नाकाम करने के लिए लड़ते रहेंगे। शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने इस कोर कमेटी की अध्यक्षता की। 

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कानून को रद्द करना ही एकमात्र समाधान: भगवंत मान
आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने कहा कि हम किसानों की मांग का समर्थन करते हैं और केंद्र द्वारा बनाए गए काले कृषि कानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं। हम और हमारी पार्टी किसानों के स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं चाहती है। उन्होंने कहा कि महीनों से जारी गतिरोध को दूर करने का एकमात्र उपाय है काले कृषि कानूनों को रद्द करना। समिति बनाना इसका कोई स्थायी समाधान नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद किसानों को विरोध वापस लेना चाहिए : अश्वनी शर्मा
पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने किसानों से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का आह्वान किया। शर्मा ने तीन कृषि सुधार कानूनों में किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत किया और आशा व्यक्त की है कि किसानों के सभी संदेह का हल किया जाएगा। 

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केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार का किसानों ने किया स्वागत

कृषि कानूनों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को फटकार लगाने का किसान यूनियनों ने स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आंदोलन को जारी रखने की घोषणा करते हैं। केंद्र के तीनों कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक लगाने के फैसले पर भाकियू एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसान यूनियनें कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रही हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए कृषि कानूनों पर रोक लगाई है। इस फैसले का यूनियन स्वागत करती है, लेकिन वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लिए जाने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। 

हर सूरत में 26 को होगी ट्रैक्टर परेड
कृषि सुधार कानून पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाने पर किसान नेताओं का तर्क है कि यह आंदोलन को ठंडा करने की कोशिश है। उनका आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा बल्कि बढ़ता जाएगा। 26 जनवरी को जो ट्रैक्टर रैली है, वह दिल्ली में जरूर होगी। इसमें लाखों ट्रैक्टर लेकर किसान हिस्सा लेंगे। 

ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की कोशिश
भारतीय किसान यूनियन के नेता अमनजोत सिंह का कहना है कि यह किसानों की 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को रोकने की कोशिश है। केंद्र सरकार घबरा गई है। हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन किसान कानून रद्द करवाकर वापस लौटेंगे। जब कानून हित में हैं ही नहीं तो इनको लागू या रोक लगाने से क्या फायदा। 
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उनका आंदोलन कानूनों को रद्द करवाने के लिए

किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो किया वह सम्माननीय है लेकिन किसान तो आंदोलन कानून रद्द करवाने के लिए कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट रोक लगा सकती थी वो कर दिया। हमारा आंदोलन स्टे के लिए नहीं बल्कि रद्द करवाने के लिए है।

किसी कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते किसान
किसान क्रांतिकारी यूनियन की राणा शेरगिल का कहना है कि किसान तो किसी कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते। सिर्फ कानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं। किसान इतने दिनों से ठंड में जिंदगी गुजार रहे हैं। कानूनों को रद्द करना ही एक मात्र रास्ता है। 

किसान किसी कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे : चबा 
किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव गुरबचन सिंह चबा ने सुप्रीम कोर्ट की ओर कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए बनाई गई कमेटी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसान किसी भी कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे। किसानों को कृषि कानूनों की वापसी के अतिरिक्त कुछ भी मंजूर नहीं है।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि कमेटी के हक में वह पहले भी नहीं थे और अब भी नहीं हैं। ये सब कुछ केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है। जब तक कृषि कानून रद्द नहीं किए जाते तब तक उनका धरना जारी रहेगा। किसी भी कीमत में किसान पीछे नहीं हटने वाले हैं। चाहे कुछ भी हो जाए। 

किसान कुंडली बार्डर रवाना
किसान संघर्ष में शामिल होने अमृतसर से सैकड़ों किसान मंगलवार को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठकर कुंडली बॉर्डर के लिए रवाना हो गए। यह किसान 26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली में भी शामिल होंगे। यह जानकारी किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव गुरबचन सिंह चबा ने दी। 
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