कृषि कानूनों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को फटकार लगाने का किसान यूनियनों ने स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आंदोलन को जारी रखने की घोषणा करते हैं। केंद्र के तीनों कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक लगाने के फैसले पर भाकियू एकता (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसान यूनियनें कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रही हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए कृषि कानूनों पर रोक लगाई है। इस फैसले का यूनियन स्वागत करती है, लेकिन वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लिए जाने तक आंदोलन को जारी रखेंगे।
हर सूरत में 26 को होगी ट्रैक्टर परेड
कृषि सुधार कानून पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाने पर किसान नेताओं का तर्क है कि यह आंदोलन को ठंडा करने की कोशिश है। उनका आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा बल्कि बढ़ता जाएगा। 26 जनवरी को जो ट्रैक्टर रैली है, वह दिल्ली में जरूर होगी। इसमें लाखों ट्रैक्टर लेकर किसान हिस्सा लेंगे।
ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की कोशिश
भारतीय किसान यूनियन के नेता अमनजोत सिंह का कहना है कि यह किसानों की 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को रोकने की कोशिश है। केंद्र सरकार घबरा गई है। हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन किसान कानून रद्द करवाकर वापस लौटेंगे। जब कानून हित में हैं ही नहीं तो इनको लागू या रोक लगाने से क्या फायदा।
किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो किया वह सम्माननीय है लेकिन किसान तो आंदोलन कानून रद्द करवाने के लिए कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट रोक लगा सकती थी वो कर दिया। हमारा आंदोलन स्टे के लिए नहीं बल्कि रद्द करवाने के लिए है।
किसी कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते किसान
किसान क्रांतिकारी यूनियन की राणा शेरगिल का कहना है कि किसान तो किसी कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते। सिर्फ कानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं। किसान इतने दिनों से ठंड में जिंदगी गुजार रहे हैं। कानूनों को रद्द करना ही एक मात्र रास्ता है।
किसान किसी कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे : चबा
किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव गुरबचन सिंह चबा ने सुप्रीम कोर्ट की ओर कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए बनाई गई कमेटी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसान किसी भी कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे। किसानों को कृषि कानूनों की वापसी के अतिरिक्त कुछ भी मंजूर नहीं है।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि कमेटी के हक में वह पहले भी नहीं थे और अब भी नहीं हैं। ये सब कुछ केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है। जब तक कृषि कानून रद्द नहीं किए जाते तब तक उनका धरना जारी रहेगा। किसी भी कीमत में किसान पीछे नहीं हटने वाले हैं। चाहे कुछ भी हो जाए।
किसान कुंडली बार्डर रवाना
किसान संघर्ष में शामिल होने अमृतसर से सैकड़ों किसान मंगलवार को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठकर कुंडली बॉर्डर के लिए रवाना हो गए। यह किसान 26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली में भी शामिल होंगे। यह जानकारी किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव गुरबचन सिंह चबा ने दी।