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Shaheed Udham Singh: ब्रिटिश कोर्ट में कठघरे पर मुक्का मार चिल्लाए थे ऊधम सिंह... मुझे मौत से डर नहीं लगता

Wed, 31 Jul 2024 07:28 AM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, संवाद, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)

सार

13 मार्च 1940 को सुनाम के रहने वाले ऊधम सिंह ने माइकल ओडवायर की हत्या कर दी थी। इस महान योद्धा को 31 जुलाई 1940 को फांसी दी गई थी। पंजाब सरकार इस बार शहीद ऊधम सिंह का 85वां बलिदान दिवस मना रही है। 
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फांसी की सजा के बाद ऊधम सिंह को ले जाते ब्रिटिश पुलिसकर्मी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पांच जून 1940 को जब ऊधम सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई, तब उन्होंने कठघरे की रेलिंग पर मुक्का मारा और ब्रिटिश हुकूमत का उपहास उड़ाया और जोरदार भाषण देकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद की पोल खोली। 

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13 मार्च 1940 को काक्सटन हाल में ऊधम सिंह ने माइकल ओडवायर पर दो गोलियां दाग दीं। जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई थी। ऊधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। 4 जून 1940 को ऊधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें लंदन पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।

पांच जून को जब ऊधम सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई तो उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की पोल खोल दी। इस पर जज ने प्रेस में कुछ भी प्रकाशित करने पर पाबंदी लगा दी। हालांकि 6 जून, 1940 को डेली हेराल्ड अखबार ने छापा कि ऊधम सिंह ने मौत की सजा की परवाह न करते हुए 20 मिनट तक विरोध में जबरदस्त स्पीच दी। फांसी की सजा सुनाने के बाद ब्रिटिश पुलिस, ऊधम सिंह को कटघरे में हटा रही थी तो जिन कागजों से ऊधम सिंह अपनी स्पीच सुना रहे थे, उनको फाड़कर उन्होंने अदालत की तरफ फेंक दिया। बाद में इन कागजों को इकट्ठा किया गया और इन पर पाबंदी लगा बेरिक्सटन जेल में रखा गया। करीब 56 साल बाद कुछ संगठनों के अभियान के चलते 1996 में इन फाइलों को जारी किया गया था। इन कागजों में ऊधम सिंह ने अपने ऐसे जज्बात लिखे हैं, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

मैं एक उद्देश्य के लिए मर रहा हं 

ऊधम सिंह ने अपना भाषण ब्रिटिश साम्राज्यवाद की निंदा के साथ शुरू किया। उन्होंने कहा कि मैं ब्रिटिश साम्राज्यवाद का नाश करने की बात कहता हूं। आप कहते हैं कि भारत में शांति नहीं है। हमारे पास केवल गुलामी है। तथाकथित सभ्यता की पीढ़ियों ने हमें मानव जाति के लिए ज्ञात हर गंदी और पतित चीज दी है। आपको बस अपना इतिहास पढ़ना है। अगर आपमें थोड़ी भी मानवीय शालीनता है, तो आपको शर्म से मर जाना चाहिए। दुनिया में खुद को सभ्यता का शासक कहने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा जिस क्रूरता और खून के प्यासे तरीके से पेश आया गया है, वह खूनी है... 

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न्यायाधीश ने उन्हें बीच में रोका, लेकिन कुछ चर्चा के बाद ऊधम सिंह ने कहा कि मुझे मौत की सजा की परवाह नहीं है। मैं एक उद्देश्य के लिए मर रहा हूं। कटघरे की रेलिंग थपथपाते हुए उन्होंने कहा कि हम ब्रिटिश साम्राज्य से पीड़ित हैं। मुझे मौत से डर नहीं लगता। मुझे मरने पर गर्व है, अपनी जन्मभूमि को आजाद कराने पर और मुझे उम्मीद है कि जब मैं चला जाऊंगा, तो मेरी जगह मेरे हजारों देशवासी आएंगे और तुम्हें बाहर निकालेंगे।

 मैं एक अंग्रेजी ज्यूरी के सामने खड़ा हूं। मैं एक अंग्रेजी अदालत में हूं। आप लोग भारत जाते हैं और जब आप अपने देश वापस आते हैं तो आपको पुरस्कार दिया जाता है और हाउस ऑफ कॉमन्स में रखा जाता है। हम इंग्लैंड आते हैं और हमें मौत की सजा सुनाई जाती है। मैं इसे स्वीकार करूंगा। मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है, लेकिन जब तुम भारत आओगे तो एक समय आएगा जब तुम्हें भारत से बाहर निकाल दिया जाएगा। तुम्हारा सारा ब्रिटिश साम्राज्यवाद चकनाचूर हो जाएगा।

अंग्रेजों से नहीं साम्राज्यवादी सरकार से शिकायत

भारत की सड़कों पर मशीनगनों ने हजारों गरीब महिलाओं और बच्चों को कुचल दिया है, जहां भी आपके तथाकथित लोकतंत्र और ईसाई धर्म का झंडा फहराता है। मैं ब्रिटिश सरकार के बारे में बात कर रहा हूँ। मुझे अंग्रेज लोगों से कोई खास शिकायत नहीं है। भारत की तुलना में इंग्लैंड में मेरे ज्यादा अंग्रेज दोस्त रहते हैं। इंग्लैंड के मजदूरों के साथ मेरी सहानुभूति है। मैं साम्राज्यवादी सरकार के खिलाफ हूं। भारत में सिर्फ गुलामी है। हत्या, अंग-भंग और विनाश-ब्रिटिश साम्राज्यवाद। लोग इसके बारे में अखबारों में नहीं पढ़ते। हम जानते हैं कि भारत में क्या चल रहा है।

आप मुझसे पूछते हैं कि मुझे क्या कहना है, मैं यही कह रहा हूं। क्योंकि आप लोग गंदे हैं। आप हमसे यह नहीं सुनना चाहते कि आप भारत में क्या कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अपना चश्मा जेब में डाला और हिंदुस्तानी में तीन शब्द बोले-ब्रिटिश साम्राज्यवाद मुर्दाबाद! 

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