तब बात इतनी बिगड़ी कि सिद्धू के कैबिनेट सहयोगियों ने भी उनसे इस्तीफे की मांग कर डाली। सिद्धू और कैप्टन के बीच एक अन्य विवाद, सिद्धू की पाक यात्रा का रहा, जिसमें सिद्धू पाक सेना प्रमुख के गले मिले और पूरे देश में उनकी जबरदस्त निंदा हुई। तब कैप्टन ने सिद्धू के गले मिलने वाले प्रसंग की खुलकर आलोचना की।
इसके बाद निर्णायक जंग लोकसभा चुनाव के दौरान छिड़ी, जब प्रचार अभियान के तहत सिद्धू ने बठिंडा की चुनावी रैली में कैप्टन सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। चुनाव परिणाम के बाद कैप्टन ने बठिंडा में हार का ठीकरा सिद्धू के सिर फोड़ा।
इस दौरान कैप्टन ने अपने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करते हुए सिद्धू से भी दोनों विभाग वापस लेकर बिजली महकमा सौंप दिया। कैप्टन की इस कार्यवाही को सिद्धू ने अपना कद घटाने के रूप में लिया और करीब सवा महीने की जद्दोजहद के बाद आखिरकार सिद्धू ने इस्तीफा देकर कैप्टन के नेतृत्व को मानने से इंकार कर दिया।
सिद्धू को काम संभालना चाहिए था: धर्मसोत
पंजाब के कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस्तीफा सिद्धू का निजी फैसला है। सिद्धू ने कुछ सोच समझकर ही फैसला लिया होगा, इस बारे में सिद्धू ही स्पष्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धू को मुख्यमंत्री की ओर से जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसे मानना चाहिए था और जो काम सौंपा गया था, उसे करना चाहिए था।
सिद्धू को निकाला नहीं, मर्जी से इस्तीफा दिया: वेरका
कांग्रेस विधायक राज कुमार वेरका ने कहा कि नवजोत सिद्धू ने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है। उन्हें मंत्रिमंडल से निकाला नहीं गया है। सिद्धू ने अपनी इच्छा से मंत्री पद छोड़ा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती। बल्कि मुख्यमंत्री ने उन्हें जो काम सौंपा था, वह उसे निभाते। वेरका ने कहा कि सिद्धू को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। इसके साथ ही वेरका ने कहा कि सिद्धू कांग्रेस पार्टी का हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है।
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष श्वेत मलिक ने सिद्धू के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 43 दिन बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार किया है। मैं समझता हूं कि 43 दिन पंजाब की जनता ऐसे समय में जब धान का सीजन हो, बिजाई चल रही हो और बिजली मंत्री के ओहदे पर कैप्टन अपने मंत्री को बैठा न सकें। 43 दिन एक मंत्री की कुर्सी खाली रही।
विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इंतजार करते रहे कि राहुल के दुलारे, प्रियंका के दुलारे नवजोत सिद्धू कब कुर्सी संभालेंगे। यह दुर्भाग्य की बात है कि पंजाब में एक मुख्यमंत्री अपने मंत्री का इंतजार करता रहा। बिजली विभाग में 43 दिन के फैसले, 43 दिन का वेतन, 43 दिन का विभाग का खर्च का हिसाब कौन देगा।
कैप्टन-बादल मिलीभगत के राज खोलने के कारण सिद्धू को हटाया : खैरा
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में कैप्टन और बादलों की मिलीभगत का जो राज उजागर किया गया था, उसी दिन कैप्टन ने मन बना लिया था कि इसे चुनाव के बाद हटाना है। उन्होंने बोगस फेरबदल किया, जिसका टारगेट सिद्धू को अलग-थलग करना था।
कांग्रेस हाईकमान भी बहुत कमजोर हो चुका है, जो सिद्धू को बचा नहीं सका। कैप्टन ने सिद्धू को कांग्रेस से भी निकालने का रास्ता साफ कर दिया है। इसीलिए हमने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि सिद्धू अगर चाहें तो हमारे साथ आ सकते हैं और पंजाब में तीसरा फ्रंट मजबूत होगा।