उन्होंने कहा कि आयकर में पांच लाख तक की छूट के मामले में वित्त मंत्री का भाषण भुलावे वाला था। एमएसएमई सेक्टर को काफी उम्मीद थी कि बजट में उनके लिए पेंशन का प्रावधान किया जाएगा। कारोबारी ऐसा व्यक्ति है, वह जब तक जीता है, परिवार के लिए काम करता रहता है। कोई एक बार विधायक बनता है और जीवन भर के लिए पेंशन लग जाती है। कारोबार बढ़ाने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। सीमांत इलाकों के लिए विशेष राहत पैकेज बहुत जरूरी था।
बैंकों पर मेहरबानी, किसानों को कुछ नहीं
पंजाब के किसान संगठन केंद्रीय बजट से पूरी तरह निराश हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि सरकार ने बैंकों को 2.60 लाख करोड़ दे दिए, पर किसानों के लिए सरकार के पास कुछ नहीं है। पांच एकड़ वाले किसानों को छह हजार दिए जाएंगे, जो बारह सौ रुपये प्रति एकड़ बनता है। पहली किस्त के बाद अगली सरकार आ गई तो पता नहीं क्या होगा।
किसान आबादी का बड़ा हिस्सा, उस पर आर्थिकता खड़ी है। अगर दो तिहाई आबादी पर बुरा प्रभाव पड़ा तो बाकी भी नहीं बचेंगे। सरकार एमएसपी खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। उससे फसलों के रेट एक तिहाई तक गिर जाएंगे।
आम आदमी पार्टी ने अंतरिम बजट को देश के लोगों को लुभाने वाला बजट बताया है। सांसद भगवंत मान ने कहा कि यह बजट चुनाव को देख कर तैयार किया गया है। लोगों को पहले की तरह जुमलेबाजी के जरिए लुभाने की कोशिश की गई है। पर मोदी सरकार इसमें कामयाब नहीं हो सकेगी। क्योंकि पिछले चार बजट ने लोगों की आर्थिकता को बुरी तरह प्रभावित किया है। सालाना छह हजार देना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। इस समय कर्ज माफी और स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की जरूरत थी।
गरीब-मजदूर हितैषी बजट - शर्मा
भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रधान कमल शर्मा ने बजट को किसान, मजदूर, गरीब और मध्य वर्ग हितैषी बताया है। उन्होंने कहा कि इससे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होने का रास्ता दिखने लगा है। सालाना छह हजार मिलने से उन्हें कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। आयकर की सीमा पांच लाख करने की मांग लंबे समय से चली आ रही थी। पीएम ने इसे लागू कर करोड़ों नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों को राहत दी है।
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश किया। पंजाब के उद्यमियों-कारोबारियों और युवाओं को उम्मीद थी कि चुनावी साल में उनके लिए बजट में कुछ न कुछ होगा। लेकिन पंजाब की झोली खाली रही। सूबे के लिए न किसी शिक्षण संस्थान, न अस्पताल और न ही किसी तरह के रोजगार सृजन की घोषणा की गई। इसके अलावा कोई नई रेल लाइन का भी एलान नहीं किया गया। वहीं पड़ोसी राज्य हरियाणा को एम्स और आठ नई रेल लाइनों की सौगात मिली। पंजाब के उद्यमियों और कारोबारियों को उम्मीद थी
किसान संगठन तो पहले से ही कह रहे है कि पंजाब सरकार की कर्ज माफी स्कीम का साधारण किसानों को नहीं बल्कि अमीर किसानों को फायदा मिल रहा है। किसान सिर्फ सहकारी सभाओं का कर्ज माफ कर रही है जबकि किसान तो बैंक और आढ़तियों के कर्ज तले दबे हैं। -जगजीत सिंह डल्लेवाला, प्रांतीय अध्यक्ष, भाकियू एकता सिद्धूपुर
पंजाब सरकार को अमीर किसानों का कर्ज माफ करने की जगह खेत मजदूरों का कर्ज माफ करने की स्कीम शुरू करनी चाहिए। छोटे किसानों की तरह खेत मजदूर भी कर्ज के बोझ के नीचे दब कर खुदकुशी करने को मजबूर हैं। -गुरपाल सिंह नंगल, प्रदेश कमेटी सदस्य, पंजाब खेत मजदूर यूनियन