चंडीगढ़। बनते ब्याज से ज्यादा ब्याज काटना आरबीएल बैंक को महंगा पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने बैंक के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता से अधिक ली 7.74 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज और 25 हजार रुपए मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया। सेक्टर-9 निवासी कंवलजीत सिंह ने उपभोक्ता आयोग में बैंक के खिलाफ केस दायर किया था।
कंवलजीत सिंह ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि उसने 7.80 करोड़ का व्यक्तिगत लॉन 2009 में आरबीएल बैंक से लिया था। उसने पहले से कोटक महिंद्रा बैंक में चल रहे लोन को चुकाने के लिए लिया था। बैंक ने शिकायतकर्ता से तीन प्रतिशत फोरक्लोजर शुल्क के रूप में काट लिए। लेकिन बनता हुए ब्याज का शुल्क एक प्रतिशत होना चाहिए था, क्योंकि यह व्यक्तिगत लॉन था। इस पर शिकायतकर्ता ने बैंक से कई बार संपर्क किया लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बैंक द्वारा गलत रूप में ब्याज काटा गया है, जो ठीक नहीं था। इस पर आयोग ने बैंक को 7.74 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने और 25 हजार रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के लिए देने का आदेश दिया।