देश के टॉप 100 बैंक डिफॉल्टरों की सूची रिजर्व बैंक को सार्वजनिक करनी होगी। केंद्रीय सूचना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट व खुद के आदेशों के बावजूद टॉप 100 बैंक डिफॉल्टरों की सूची सार्वजनिक न किए जाने का कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने आरबीआई गवर्नर को पांच दिन में सूची सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने इस केस में 7 वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट व केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों की उल्लंघन कर सूची सार्वजनिक न करने के लिए रिजर्व बैंक गवर्नर को जिम्मेवार ठहराते हुए नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन पर अधिकतम जुर्माना लगाया जाए? केस की अगली सुनवाई 26 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय सूचना आयोग में होगी। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में 16 अगस्त 2010 को आरटीआई लगाकर देश के शीर्ष 100 बैंक डिफॉल्टरों की सूची मांगी थी।
आरबीआई ने यह सूची सार्वजनिक करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि इससे बैंक व उद्योगपतियों के आपसी संबंध खराब हो जाएंगे। तत्कालीन केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने 15 नवंबर 2011 को आरबीआई को सूची सार्वजनिक करने के आदेश दे दिए थे, लेकिन आरबीआई निर्णय के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट में चला गया।
सुप्रीम कोर्ट में कपूर के वकील प्रशांत भूषण के तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2015 को केंद्रीय सूचना आयोग के निर्णय को सही ठहराते हुए सूची सार्वजनिक करने के आदेश दे दिए। बावजूद रिजर्व बैंक ने सूची नहीं जारी की। कपूर ने बताया कि आयोग ने 2 नवंबर 2018 को रिजर्व बैंक को डिफॉल्टरों की सूचना पांच दिन में अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं, मगर अभी तक सूची जारी नहीं हुई है। कपूर ने आरोप लगाया कि रिजर्व बैंक व केंद्र सरकार बैंक डिफॉल्टर पूंजीपतियों के दबाव में है। अगर ये लिस्ट 9 वर्ष पूर्व जारी हो जाती तो बड़े-बड़े बैंक डिफॉल्टर देश से बाहर नहीं भाग पाते।