उसके बाद चढ़ाई करते हुए रवि ठाकुर व उनके दल ने 16 मई को डेढ़ बजे एवरेस्ट चोटी पर झंडा फहराया था। उसने 10 मई को उनसे बातचीत की थी। साथ ही कहा था कि अब एवरेस्ट फतह कर वापस आने के बाद ही बातचीत करूंगा। उन्हें क्या पता था कि अब उन्हें कभी अपने बेटे की आवाज सुनाई नहीं देगी।
घर में शुक्रवार दोपहर बाद आई बेटे की मौत की खबर
महेश ने बताया कि बेटे के एवरेस्ट फतह करने के बाद से पूरा परिवार खुशी में डूबा था। उनको शुक्रवार सुबह समाचार पत्रों में बेटे के एवरेस्ट फतह करने का पता चला था। लेकिन दोपहर बाद तीन बजे रवि के दोस्त कर्मेंद्र ने उन्हें फोन करके बताया कि रवि की हादसे में मौत हो गई है। जिसके बाद से परिवार के सदस्यों का रोकर बुरा हाल है। सभी एक-दूसरे को ढांढस बंधाने में लगे हैं।
महेश ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी के अलावा उसके चार बच्चे थे जिसमें सबसे बड़ा बेटा प्रदीप है। उससे छोटी बेटी मीनू, फिर तीसरे नंबर का रवि था। सबसे छोटी बेटी शालू है। रवि बचपन से ही काफी होनहार था। उसने सोनीपत के शंभू दयाल स्कूल से 12वीं कक्षा की पढ़ाई की थी।
उसके बाद बीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रायपुर से बीटेक की थी। उसके बाद वह साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की जॉब करने लगा। वह डेढ़ साल से गुरुग्राम के उद्योग विहार के फेस-4 स्थित पॉवर-2 एसएमई कंपनी में काम कर रहा था। कंपनी प्रबंधन की तरफ से उनके बेटे को काफी मदद की थी।
22 मई को आएगा शव
परिजनों ने बताया कि रवि का शव 22 मई को आएगा। शव को 22 मई को बेस कैंप में लाया जाएगा जहां से शव को दिल्ली और फिर घर लेकर आया जाएगा। प्रशासन की तरफ से उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है। हालांकि अभी तक कोई बड़ा अधिकारी उनके पास नहीं आया है।