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निजी बसें चलीं, पर अब रोडवेज का चक्का जाम

Sun, 07 Sep 2014 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कैथल। सरकार द्वारा निजी बस संचालकों को दिए जा रहे परमिट के विरोध में शनिवार को रोडवेज कर्मचारी यूनियनों ने चक्का जाम कर दिया। कैथल के साथ-साथ पूरे प्रदेश में बसों को निजी परमिट पर कोई फैसला न होने तक रोडवेज कर्मचारियों ने चक्का जाम का फैसला किया है।
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गौरतलब है कि चक्का जाम के दौरान जिले में 140 बसें नहीं चली। जो बसें रूटों से वापस लौटी, ड्राइवर उन्हें अड्डे पर खड़ी करके चले गए। इसके अलावा रोडवेज कर्मचारियों ने बस अड्डा परिसर में धरना दिया। उध्र, प्राईवेट बसें बस अड्डे के बाहर से चलीं। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिली। जिला प्रशासन पूरा दिन स्थिति पर नजर रखे रहा। बस अड्डे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

ये है मामला
विदित रहे कि कैथल में ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा करीब 68 बसों के लिए नए निजी परमिट जारी किए गए हैं। इन परमिटों को लेकर आरटीए कार्यालय  की ओर से प्रोविजनल टाइम टेबल जारी किया था। इसी आधार पर निजी बस चालक बसें चलवाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन रोडवेज कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामले में जब तक 11 सितंबर तक न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता है, तब तक प्राइवेट बसें नए रूटों पर प्रोविजनल टाइम टेबल पर नहीं चल सकती हैं। कर्मचारियों ने तीन सितंबर को भी चक्का जाम कर दिया था। इसके बाद प्राईवेट बस चालकों ने चार और पांच सितंबर को जिले के 68 रूटों पर बस सेवा बंद रखी थी और प्रोविजनल टाइम टेबल पर ही बस चलाने की मांग की थी।
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अड्डे के बाहर से चलीं प्राइवेट बसें
शनिवार सुबह बस अड्डे पर पहुंच कर निजी बसों को चलाने का प्रयास किया गया। जिसका कर्मचारियों ने विरोध किया। इसके बाद निजी बसों को बस अड्डे के बाहर से ही संचालन शुरू कर दिया गया। जिसके विरोध में कर्मचारियों ने चक्का जाम का ऐलान कर दिया। हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी, हरियाणा कर्मचारी महासंघ व हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के सदस्याें ने सुबह साढ़े सात बजे रोडवेज का चक्का जाम का ऐलान किया। रोडवेज कर्मचारी बस स्टैंड पर धरने पर बैठ गए व हड़ताल की घोषणा कर दी।

टाइम टेबल जारी करने पर उठाया सवाल
प्राइवेट बस चालकों व रोडवेज कर्मियाें के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए बस स्टैंड को छावनी में तबदील कर दिया गया। केन्द्रीय कमेटी सदस्य पहल सिंह ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने प्राईवेट परमिटों पर स्टे दिया तो किस प्रकार आरटीओ कार्यालय परमिट व टाइम टेबल जारी कर सकता है? जब नया टाइम टेबल प्राईवेट के पास नहीं है और पुराने परमिट रद्द हो चुके हैं तो बसाें को अवैध रूप से चलाया नहीं जा सकता। लेकिन प्राईवेट बस चालक मानने को तैयार नहीं है। जब तक इस मामले में कोई फैसला नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने को अध्यापक नेता सतबीर गोयत, श्याम लाल कल्याण, राजबीर भाणा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर हाकम सिंह जिला सचिव, सतीश मलिक, महाबीर सिंह, प्रधान सुरजभान श्योकंद, एसएफआई के जिला प्रधान विजय कुमार व संयोजक गौरव शर्मा, रामनिवास, रवि, सुरजन सिंह रोड़, ओम प्रकाश गोयत, श्याम लाल कल्याण, राजबीर, राजेन्द्र सिंह, बिजली विभाग से सेक्रेटरी सुरेश कुमार, कृष्ण कुमार, जगदीश कुमार, गुरुनाम सिंह, सुखदेव रसुलपूर, गायक सन्त लाल, शमशेर सिंह सिसमौर सहित कर्मचारी मौजूद थे।

निजी बस चालकों को हटाना पड़ा धरना
रोडवेज के आंदोलन के बाद प्राईवेट बस चालक भी बस अड्डा परिसर में ही धरने पर बैठ गए। जिस पर यूनियन के कमेटी सदस्य पहल सिंह सहित अन्य नेताओं नेडीएसपी टेकनराज को शिकायत दी। जिस पर निजि बस संचालकों ने वहां से धरना हटा लिया।

ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी छुट्टी पर
ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी जीएम रोडवेज एवं आरटीए दोनों ही अधिकारी परमिट के ज्वलंत मुद्दे के बीच छुट्टी पर चले गए हैं। जिस कारण इस मामले में कर्मचारियों एवं बस संचालकों से बातचीत करने के  लिए सक्षम अधिकारी ही नहीं हैं। विभाग मुख्यालय से भी एक सप्ताह से जारी गतिरोध पर सुनवाई के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। जिस कारण पूरे मामले पर संशय बना हुआ है। दूसरी ओर जिला प्रशासन के लिए यह मामला गले की फांस बना हुआ है। क्योंकि ट्रांसपोर्ट विभाग का मामला होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी रोडवेज विभाग के अधिकारियों के बिना कोई भी फैसला लेने में सक्षम नहीं है।
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