रेंज फारेस्ट आफिसर कर्ण सिंह के आइडिया ने ऐस किया कमाल, सुखना लेक में आ रहे दूषित पानी की तस्वीर ही बदल गई। कांसल से सुखना में आ रहे सीवरेज के पानी को फारेस्ट डिपार्टमेंट ने न सिर्फ उसे रोका, बल्कि उसे साफ कर दिया है। वो भी देसी तरीके से।
फारेस्ट डिपार्टमेंट के रेंज फारेस्ट आफिसर कर्ण सिंह ने यह कमाल किया है। उनके प्रयोग को चंडीगढ़ पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) ने अपनी लेबोट्ररी में चेक किया, जिसमें उन्हें सौ में से सौ नंबर मिले हैं।
रिपोर्ट बताती है कि पानी से सभी हानिकारक तत्व बाहर हो गए और उससे अब न तो किसी जीव को खतरा है और न ही पेड़-पौधे व पर्यावरण को। पहले तो चंडीगढ़ प्रशासन के किसी भी अधिकारी को कर्ण सिंह के प्रयोग पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब से सीपीसीसी की रिपोर्ट आई है, तब से फारेस्ट डिपार्टमेंट की वाहवाही हो रही है।
सीवरेज के पानी को ऐसे साफ किया
चंडीगढ़ की शान सुखना लेक
- फोटो : अमर उजाला
कांसल के सीवरेज और घरों का दूषित पानी रॉक गार्डन, लेक फारेस्ट के रास्ते सुखना लेक में पहुंच रहा था। रेंज फारेस्ट आफिसर कर्ण सिंह ने चैनल के माध्यम से दूषित पानी के तल को करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा किया। लेक के फारेस्ट एरिया में पानी के एंट्री प्वाइंट पर रेत-बजरी, मूंज (सेकरम मूंज) के पेड़ और आयरन ओर्ज (स्क्रैप का बचा हुआ भाग) को डाला।
अब सारा पानी इससे होकर निकल रहा है। आगे जाकर कुछ दूरी पर पानी को केदू, नीम और कीकर की जड़ों के बीच से निकालकर वाटर बाडी बना दी गई है। ये वाटर बाडी नगर वन में बनाई गई है। इतने चक्र से निकलने के बाद पानी से हानिकारक तत्व निकल गए हैं।
पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी की रिपोर्ट ने किया प्रमाणित
करीब डेढ़ माह बाद चंडीगढ़ पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने नगर वन से सैंपल लिए। उसे प्रयोगशाला में भेजा गया। जब उसकी रिपोर्ट आई तो सभी की आंखें खुली रह गईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी में केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) व बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा मानक से भी कम पाया गया है, जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं कर पाते। सरकार की नई गाइडलाइंस के मुताबिक बीओडी 20 मिलीग्राम होना चाहिए। जबकि यहां पर बीओडी सात मिलीग्राम मिला है।
किसका क्या काम है
भले ही गर्मी से कुछ राहत मिली है, मगर पिछले दिनों गर्मी के कारण सुखना में गिरा पानी का स्तर।
- फोटो : अजय वर्मा
मूंज (सेकरम मूंज): पानी से फास्फेट को निकालता है।
रेत बजरी : दूषित पानी के कण को शुद्ध करने का काम करता है।
पेड़ों की जड़ें : फास्फेट को कम करता है।
आयरन ओर्ज : केमिकल आक्सीजन डिमांड को कम करता है।
भूसी : फास्फेट की मात्रा को हटाता है।
कांसल के पानी ने 20 एकड़ जंगल को खत्म कर दिया
फारेस्ट डिपार्टमेंट ने जांच में पाया है कि कांसल के हानिकारक पानी ने तबाही मचा रखी थी। लेक के करीब 20 एकड़ जंगल के एरिया को पूरी तरह से बरबाद कर दिया। हरे-भरे पेड़ पूरी तरह से सूख गए हैं। इससे बारहसिंगा व अन्य जानवरों को स्किन की समस्या हुई। सुखना लेक में वीड को पनपने दिया। फारेस्ट डिपार्टमेंट ने कई बार पंजाब को सीवरेज के पानी को रोकने के लिए लिखा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।