सुखना लेक को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश
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चंडीगढ़ की पहचान उसकी शान सुखना झील को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी चिंतित है, जिसके चलते चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार पड़ी। हाईकोर्ट ने झील का वजूद बचाने को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के रवैये को देखते हुए अफसरों को जमकर फटकार लगाई। जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि प्रशासन के अफसर कुछ तो ऐसा करें जिससे यह लगे कि झील को बचाने के लिए कुछ काम हो रहा है।
खंडपीठ ने अगली सुनवाई पर प्रशासक के सलाहकार, वित्त सचिव और मुख्य वन संरक्षक को हाईकोर्ट में पेश होने का आदेश जारी किया है। सुखना को बचाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी के अलावा सुझाव भी देने को कहा है। चीफ इंजीनियर को दो हफ्ते के भीतर सुखना लेक में उगी हुई सारी जलीय वनस्पति (वीड) को हटाने के निर्देश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
खंडपीठ ने कहा कि वीड निकालने का काम चाहे चंडीगढ़ इंजीनियरिंग विभाग करे या आउट सोर्सिंग के जरिए करवाए, दो हफ्ते में सुखना लेक से सारी वीड हट जानी चाहिए। सोमवार के सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने उक्त आदेश जारी करने के साथ ही इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे एमिक्स क्यूरे एडवोकेट एमएल सरीन और तनु बेदी सहित एडवोकेट रीटा कोहली और अन्य सदस्यों को 20 सितंबर शाम 5 बजे लेक का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने को भी कहा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सुखना लेक चंडीगढ़ के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी हाईकोर्ट को बताएं कि इस मामले में क्या कुछ किया जा सकता है।
सुखना पर और दो हफ्ते तक लोग दे सकते हैं सुझाव
40 नई बोट्स सुखना लेक में उतरेंगी
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हाईकोर्ट ने सुखना लेक को बचाने के लिए ट्राईसिटी के लोगों से सुझाव मांगे थे। इसके लिए एमिक्स क्यूरे एडवोकेट तनु बेदी ने ई-मेल आईडी उपलब्ध कराया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान एडवोकेट तनु बेदी ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके पास कई लोगों के सुझाव आए हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने भी आम लोगों से सुझाव मांगने के लिए 24 अगस्त को पब्लिक नोटिस जारी किया था, लिहाजा और सुझावों के लिए थोड़ा समय दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने और दो हफ्ते का समय देते हुए आम लोगों के सुझाव लेने की अवधि बढ़ा दी।
सुखना तक नहीं जा सकता है पटियाला की राव का पानी
पंजाब सरकार की ओर से इस मामले में सोमवार को ड्रेनेज सर्किल पटियाला के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर बीपीएस बराड़ ने हलफनामा दायर करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि भौतिक, पर्यावरण और प्राकृतिक कारणों से पटियाला की राव का पानी सुखना लेक तक नहीं लाया जा सकता। इस पर हाईकोर्ट ने पाइप लाइन के जरिये पटियाला की राव का पानी सुखना लेक तक पहंचाने की संभावना के बारे में जानकारी देने को कहा है।
‘झील को लबालब करने को कितना पानी चाहिए’
भले ही गर्मी से कुछ राहत मिली है, मगर पिछले दिनों गर्मी के कारण सुखना में गिरा पानी का स्तर।
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सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर से जानना चाहा कि सुखना लेक को पूरा भरने के लिए कितने पानी की जरूरत होगी और यह पानी किस स्रोत से उपलब्ध होगा। हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर को साफ कह दिया कि इस साल के अंत तक सुखना लेक लबालब भर जानी चाहिए।
चाहे इसके लिए ट्यूबवेल लगाने पड़ें या नए बोर या फिर पटियाला की राव या अन्य किसी स्त्रोत से पानी सुखना तक लाने के लिए पाइप लाइन बिछानी पड़े। हाईकोर्ट को इस बारे में सारी जानकारी अगली सुनवाई पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।