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'रामपाल की तारीफ करो, तभी मिलेगी छुट्टी'

Fri, 21 Nov 2014 12:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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सतलोक आश्रम के मुखिया रामपाल के नजदीकी एवं कट्टर भगत रहे डॉ. ओपी हुड्डा झज्जर में सिविल सर्जन रह चुके हैं। उन्होंने दो साल तक यहां के सिविल अस्पताल में अपनी सेवाएं दी हैं।
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उस दौरान भी वे रामपाल के भगत थे तथा अपने गुरु के उनके खिलाफ एक भी शब्द सुनना उन्हें मंजूर नहीं था। अगर कोई रामपाल के खिलाफ कुछ भी बोल देता तो वे उसके साथ उलझ पड़ते थे।

डॉ. ओमप्रकाश हुड्डा को तीन जनवरी, 2007 को शहर के सिविल अस्पताल में सीएमओ पद का कार्यभार दिया गया था। तब से लेकर 29 जनवरी, 2009 तक वे इस पद पर बने रहे। अक्सर वो बाबा रामपाल के सत्संगों में भी जाया करते थे। उन्होंने अपने आवास में भी रामपाल की फोटो लगाई हुई थी।
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अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि डॉ. ओपी हुड्डा कई बार कर्मचारियों के सामने भी उनकी महिमा मंडन किया करते। कर्मचारियों ने बताया कि अगर किसी को छुट्टी लेनी होती तो वो सीएमओ के पास जाकर रामपाल की थोड़ी प्रशंसा करते थे। सीएमओ खुश हो जाते और तुरंत छुट्टी मिल जाती थी। अगर सतलोक आश्रम में सत्संग होता और उस दिन कोई कर्मचारी सत्संग में जाने के बहाने छुट्टी मांगता तो उसे भी तुरंत छुट्टी दे दिया करते थे।
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पंजीकरण रद हो सकता है

पीजीआईएमएस स्थित फोरेंसिक विभाग के आचार्य एवं गर्वमेंट ऑफ हरियाणा के मेडिको लीगल एडवाइजर बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एसके धत्तरवाल ने बताया कि कोई भी चिकित्सक यदि किसी की गलत मेडिकल रिपोर्ट देता है तो उसका स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा चेतावनी दी जाती है। जांच में यदि मेडिकल सर्टिफिकेट गलत पाया जाता है तो चिकित्सक का पंजीकरण रद कर दिया जाता है। इससे चिकित्सक अपनी मेडिकल प्रेक्टिस नहीं कर सकता। रामपाल का स्वास्थ्य जांचने वाले चिकित्सक ओपी हुड्डा ऑखों के सर्जन हैं। वे किसी को पूर्ण मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं दे सकते। इस पर कोर्ट संज्ञान ले सकती है।

सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार के अनुसार कोई चिकित्सक यदि गलत मेडिकल फिटनेस जारी करता है तो उसका पंजीकरण रद हो सकता है। इससे भविष्य में वह मेडिकल प्रेक्टिस नहीं कर सकता।
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