करौंथा आश्रम के जमीन फर्जीवाड़े मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कीर्ति जैन की अदालत ने संत रामपाल को साजिश में शामिल माना है। उनके खिलाफ केस चलेगा। रोहतक कोर्ट ने उन्हें दस दिसंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। संत रामपाल ने इस मामले में याचिका दायर की थी, जिसे मंगलवार को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि मामला काफी लंबा हो गया है, ऐसे में पेशी में छूट भी नहीं दी जा सकती है।
रोहतक-झज्जर हाइवे पर जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी. दूर करौंथा में संत रामपाल ने 1999 में आश्रम बनाया। इस जमीन को लेकर शुरू से ही विवाद चल रहा है। 2006 में गांव करौंथा के करतार सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि यह जमीन उसकी भतीजी कमला के नाम है, लेकिन रामपाल और उसके सहयोगियों ने कमला की जगह किसी दूसरी महिला को खड़ाकर रजिस्ट्री करा डाली।
मामले में स्टेट बनाम रामपाल पुत्र नंदलाल गांव धनाना, हाल चेयरमैन करौंथा आश्रम, रजिस्ट्री कराते वक्त कमला की जगह उपस्थित होने वाली करौंथा की कृष्णा के अलावा इस साजिश के आरोपी सुनहरी, राजेंद्र, कृष्णलाल, रुबीना, सत्यदेव, राजेंद्र, रविंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। कमला के वकील नरेंद्र कटारिया ने बताया कि मामले में रामपाल ने 25 मई 2014 को कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह इस साजिश में शामिल नहीं था।
बाकी अन्य लोगों ने ही पूरा फर्जीवाड़ा किया है। याचिका में संत रामपाल ने अपने आप को बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट का मुखिया बताते हुए कहा कि इस ट्रस्ट को कोई फायदा नहीं हुआ।
ऐसे में उन्हें साजिशकर्ताओं में शामिल न किया जाए। कटारिया के अनुसार कोर्ट ने मंगलवार को उनकी याचिका खारिज कर दी है। अब उन्हें दस दिसंबर को कोर्ट में पेश होना होगा।