उन्होंने कहा, अगर वह स्वार्थी होते तो 30 वर्षों तक इनेलो के प्रति पूर्ण समर्पित न रहते। अब वह इनेलो को अलविदा कर चुके हैं, इसलिए वे लोग जो मर्जी कहते रहें। कुछ लोगों का काम ही कहना है। इनेलो से इस्तीफा उन्होंने हालत से मजबूर हो व मुख्यमंत्री की पारिवारिक जंग के चलते दुखी होकर दिया। पिछले एक साल से इनेलो में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जो जंग चल रही है वह जग जाहिर है।
एक व्यक्ति विधायक भी नही हैं और सीएम आया के नारे लगवाए जाते हैं। परिवार व दल दोनों टूट चुके हैं। भविष्य में वह किस राजनीतिक दल में जाएंगे, ये निर्णय अपने कार्यकर्ताओं और जनता से बातचीत के बाद लेंगे। उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति है। वह हर निर्णय जनता की इच्छा से ही लेंगे। उन्होंने किसी जल्दबाजी में इस्तीफा नहीं दिया, जो लोग उन्हें स्वार्थी कह रहे हैं वह उनकी निजी सोच हो सकती है। जब वह इनेलो में ही नहीं रहे तो विधायक पद पर भी बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।