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PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर हाईकोर्ट ने दी सफाई, मीडिया को कड़ी फटकार

Thu, 31 Aug 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी को लेकर मचे बवाल के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सफाई पेश की और मीडिया संस्थानों को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने मंगलवार को गलत रिपोर्टिंग के लिए मीडिया संस्थानों को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री है, ऐसी कोई टिप्पणी हमने नहीं की फिर भी कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे प्रकाशित कर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि हमने पहले भी मीडिया से उम्मीद जताई थी कि वे जिम्मेदारी से अपना काम करेंगे परंतु कुछ ने अपनी जिम्मेदारी को सही प्रकार से नहीं निभाया। बिना संदर्भ समझे इस प्रकार का समाचार प्रकाशित करना निंदनीय है। मोदी का नाम कोर्ट में नहीं लिया गया बावजूद इसके  समाचार पत्रों ने उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जो दुर्भाग्यपूर्ण है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने मीडिया में आई मोदी को लेकर कोर्ट की टिप्पणी को गलत करार देते हुए कहा कि कोर्ट की पत्रकारिता में गंभीरता बरतने की जरूरत होती है जो इस मामले में नहीं किया गया।

कोर्ट के सामने सत्यपाल जैन ने कहा कि जो बात हुई नहीं और जिस संदर्भ में नहीं हुई उसे प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए। इस पर सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने मीडिया संस्थानों का बचाव किया। गुप्ता की दलीलों के बाद कोर्ट ने इस मुद्दे को यहीं छोड़ दिया और चेतावनी भरे लहजे में आशा जताई कि भविष्य में हाईकोर्ट की खबरों को गंभीरता से कवर किया जाएगा। यहां बता दें कि अमर उजाला ने अपनी जिम्मेदारी को समझा और निभाया है। प्रधानमंत्री मेादी को लेकर कोर्ट की कोई टिप्पणी प्रकाशित नहीं की गई।
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दंगाइयों पर गोली चलाना पुलिस की कोई गलती नहीं

Ram Rahim Verdict
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच इस मामले में सुरक्षा बलों के साथ खड़ी दिखाई दी। यदि कोई युद्ध जैसे हालात पैदा करेगा तो उसे युद्ध की तरह की जवाब मिलेगा। हम दंगाइयों के हाथों पुलिस को नहीं पिटते देखना चाहते बल्कि दंगाइयों को सबक सिखाने वाली पुलिस चाहते हैं। हाथ में पेट्रोल बम लेकर खड़े व्यवस्था के खिलाफ खड़े लोगों पर गोली चलाने में कोई बुराई नहीं है।

डेरा मुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला सहित पंजाब-हरियाणा में बने हालातों और डेरा समर्थकों द्वारा की गई तोड़फोड़ और आगजनी को हाईकोर्ट ने युद्ध जैसे हालात करार दिया। कोर्ट ने कहा कि पेट्रोल बम, एके 47 और अन्य घातक हथियारों के साथ शांतिपूर्वक प्रदर्शन नहीं होता। जिस प्रकार हथियारों की बरामदगी हुई है उसे देखते हुए पुलिस कार्रवाई बिलकुल सही है। हाईकोर्ट ने कहा की यदि युद्ध जैसी स्थिति बन जाए तो ऐसी स्थिति से उसी तरह निपटना जरूरी हो जाता है।

पुलिस और सुरक्षा बलों ने जिस सख्ती के साथ इस दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की है उसी का नतीजा है कि इस पूरी स्थिति पर कुछ ही घंटों में काबू पा लिया गया वरना हालात जाट आरक्षण आंदोलन जैसे हो जाते। सुरक्षाबलों ने अपनी इस कार्रवाई से लोगों में एक संदेश दिया है कि दोबारा अगर किसी ने इस तरह की हरकत की तो उनके खिलाफ भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। जस्टिस एसएस सरों, जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस अवनीश झिंगन की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस कभी कमजोर और पीड़ित नजर नहीं आनी चाहिए।
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