राम रहीम और उसके डेरा सच्चा सौदा को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसा ही एक सच अब सामने आया है, जिसके कारण कइयों पर गाज गिर सकती है। दरअसल, गुरमीत सिंह राम रहीम की अगुवाई में डेरा सच्चा सौदा किसी फकीर का डेरा नहीं रह गया था, बल्कि एक ऐसी मायानगरी बन गया, जिसमें कई तरह के लेन देन के धंधे हो रहे थे।
इसके दायरे में एक मनोरंजन उद्योग, एक रियल इस्टेट का धंधा, एग्रो बिजनेस और होटल रिसोर्ट्स भी चल रहे थे। डेरे के अंदर फ्लेट्स, बंगले और कोठियां बन रही थीं। डेरा इनके लिए लाखों रुपये वसूल कर इन्हें लोगों को देता था। यह वसूली और विनिमय बिना रजिस्ट्री के हो रहा था।
राजस्व को चपत लग रही थी और सरकार का राजस्व विभाग आंखें मूंदे बैठा था। बाबा का प्रभाव इतना था कि राजस्व अधिकारी यही कहते हैं कि कोई शिकायत आएगी तो जांच की जाएगी। डेरा अपनी जमीन और मकान का मालिक है, वह जिसे चाहे रहने को दे सकता है।
देखते ही देखते बस गया शाह सतनाम नगर
डेरा सच्चा सौदा का विस्तार वर्ष 1990 से उस समय शुरू हुआ जब गुरमीत राम रहीम सिंह ने डेरा की गद्दी संभाली थी। पुराने डेरे के सामने शाह सतनाम नगर बसाया गया, जहां पर फ्लैट बनाए गए। अच्छी-खासी राशि लेकर बिना रजिस्टरी सेवादारों और पदाधिकारियों को इन मकानों पर कब्जा दिया गया।
शर्त यही थी कि वे किसी दूसरे को मकान नहीं बेच सकते। मकान डेरे को ही लौटाएंगे और डेरा बिना ब्याज उतनी ही राशि का भुगतान करेगा। इस काम में राम रहीम के डेरे को इतनी कमाई हुई कि उसने अपना पूरा ध्यान इस ओर लगा दिया।
बस गया आधुनिक शहर और सरकार ने माना गांव
Ram rahim
गांव नेजिया और शाहपुर बेगू में जमीन खरीदी गईं। नेजिया गांव की ओर विस्तार अधिक किया गया, क्योंकि शाहपुर बेगू वाला क्षेत्र सिरसा तहसील के अधीन आता है जहां पर कलेक्टर रेट 14 लाख रुपये प्रति एकड़ है, जबकि गांव नेजिया नाथूसरी चोपटा क्षेत्र में आता है जहां पर कलेक्टर रेट 9.90 लाख रुपये प्रति एकड़ है। नेजिया के पास वाली जमीन पर डेरे ने फ्लेट बनवाए तो बाजेगा रोड पर फैक्टरियां बनाई गईं।
इस रोड पर आगे चलकर गांव अली मोहम्मदपुर रकबा में 35 एकड़ भूमि में फिल्म शूटिंग रेंज बनाई। नेजिया की ओर शाह सतनामपुरा, शाह सतनाम धाम, उपकार कॉलोनी बनाई गई। करीब 400 करोड़ रुपये खर्च करके 200 कोठियां बनाई गई। 270 करोड़ की लागत से 450 फ्लैट थ्री बीएचके, 580 करोड़ की लागत से 1400 फ्लैट वन और टू बीएचके श्रेणी के बनाए गए। डेरा परिसर में एमएसज रिसोर्ट, फाइव स्टार होटल, अस्पताल, क्रिकेट स्टेडियम और शिक्षण संस्थान बने। पहले डेरा शाहपुर बेगू पंचायत के अधीन था।
डेरा आधुनिक शहर के रूप में विकसित होता जा रहा था, ऐसे में डेवलपमेंट शुल्क शहरी क्षेत्र की भांति न लगे इसके लिए डेरा ने सरकार के समक्ष आवेदन कर शाह सतनाम पुरा नाम से पंचायत का गठन करवा लिया। इस गांव को सरकार की ओर से अनेक छूट का प्रावधान है। फैक्टरियां लगाने पर कर में छूट होती है। सीएलयू का चक्कर नहीं होता।
डेरा अपनी भूमि पर कुछ भी बना सकता है
गुरमीत राम रहीम
राजस्व के घाटे को लेकर जब जिला राजस्व अधिकारी नौरंग दास से इस बारे में पूछा गया तो पहले तो उन्होंने ऐसी किसी बात से इंकार किया, लेकिन बाद में कहा कि डेरा अपनी भूमि पर कुछ भी बना सकता है। मकान बनाए हैं तो उसमें डेरा किसी को भी रख सकता है।
उनका कहना है कि प्रॉपर्टी तो डेरा की है अगर डेरा किसी को प्रॉपर्टी बेचता है तभी तो उस पर स्टांप ड्यूटी लगेगी। किसी भी भूमि या मकान की खरीद पर शहरी क्षेत्र में सात प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगती है। उन्होंने बताया कि अगर इस मामले में कोई शिकायत आई तो उसकी जांच करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।