रक्षाबंधन से पहले आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने बहनों की उम्मीदों को तोड़ दिया। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद मिर्चपुर गांव में अब बहनों को राखी उत्सव को लेकर उत्साह नहीं है। कई बहनों को उम्मीद थी कि आठ साल से जेल में बंद उनके भाई शायद इस रक्षाबंधन पर घर आएंगे। इस बार उन्हें गांव के लोगों ने रक्षाबंधन न मनाने का फैसला लिया है।
गांव मिर्चपुर में रक्षाबंधन को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा। बड़ी संख्या में बहनें अपने गांव पहुंचकर भाइयों को राखी बांधने के लिए शनिवार को ही पहुंच गईं। गांव मिर्चपुर के बस अड्डे पर सन्नाटा पसरा रहा। यहां बहनों का आवागमन नहीं रहा। शनिवार को गांव की दुकानों में खामोशी रही। अधिकतर दुकानों पर ताले दिखे। इस फैसले के बाद लोग अपने घरों में ही रहे। त्योहार को लेकर उत्साह नहीं दिखा। गांव के लोगों ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाएंगे। बहनों ने भी आने से मना कर दिया है।
कुलविंद्र, रामफल, राजेंद्र, कर्मबीर, संजय, प्रदीप, राजपाल, प्रदीप कुमार, सत्यवान, दया सिंह, राजबीर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इन परिवारों को उम्मीद थी कि इस बार शायद उनके बेटे घर आएंगे। अब अदालत ने उन लोगों को भी सरेंडर करने के लिए आदेश दिए हैं, जिन लोगों को निचली अदालत ने छोड़ दिया था।
अब बस्ती की ओर से जाने से भी डर....
एक समुदाय के लोगों ने कहा कि अब दूसर समुदाय की बस्ती की ओर जाने से भी डर लगता है। पता नहीं किस बात को लेकर लांछन लगा दिया जाए। कौन किस बात को किस तरह से प्रस्तुत कर देगा। जरा सी बात हुई तो कहां से कहां पहुंच जाएगी। हम चाहें कुछ भी बोले, हमारी कोई सुनेगा नहीं। इस घटना ने गांव के नाम को बर्बाद कर दिया।
मीडिया पर भड़के ग्रामीण
गांव के बुजुर्ग मीडिया पर भी भड़कते दिखे। ग्रामीणों ने कहा कि मीडिया ने इस मामले को इस तरह से प्रस्तुत किया, जिससे यहां भाईचारा नहीं बन सका। गांव की छवि को खराब कर दिया। अब भी मीडियाकर्मी आकर उसी तरह से उस बदनसीब रात के बारे में ही पूछते हैं।