चंडीगढ़। टैगोर के मंच पर आठ मटकों को सर पर रखकर डांस करते हुए जैसे ही सुरेश व्यास पहुंचे तो चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर का ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला द्वारा चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से आयोजित लोकनृत्य उत्सव के पहले दिन का। इस दौरान राजस्थान के पारंपरिक लोकनृत्यों को प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर यूटी के डायरेक्टर कल्चरल अफेयर्स राकेश पोपली चीफ गेस्ट थे। साथ ही एनजेडसीसी के अध्यक्ष डॉ. सौभाग्य वर्धन और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन कलम अरोड़ा भी मौजूद रहे।
चंडीगढ़ के टैगोर थियेटर में भवई नृत्य करने वाले सुरेश व्यास और उनके डांस ग्रुप ने सभी का मन मोह लिया। यह नृत्य शीतला माता को समर्पित रहा। इस लोकनृत्य उत्सव के दौरान राजस्थान और पंजाब के अलग अलग रीजन से डांस ग्रुपों ने प्रतिभागिता की। टैगोर थियेटर में इसके दौरान बाणमेर से आए कालबेलिया ग्रुप ने अपनी लंगा गायिकी को सुनाया। इसके साथ ही जोधपुर के सूरामथ कालबेलिया ग्रुप की प्रस्तुति शानदार रही। इस ग्रुप ने म्हारो गोरबंध नखरालो हांजी लडली लुम्बा झूम्बा रे म्हारो गोरबंध... गीत पर परफार्म किया। जिसमें महिला डांसरों ने यहां तैयार एकदम सर्प के अंदाज में डांस करके सभी का दिल जीत लिया। इस डांस की उत्तपत्ति संपेेरों के परिवार के साथ हुई है। जो कि बीन और ढपली पर डांस करते हैं। जैसे जैसे वक्त बीता महिलाओं ने इस डांस को लोकनृत्य के रूप में अपनाया। इस बीस मिनट की परफारमेंस के दौरान तीन अलग अलग प्रकार के डांस नंबरों को दिखाया गया।
इस मौके पर पाली जिले से आए गंगा देवी ग्रुप ने बेहतरीन अंदाज में राजस्थानी प्रस्तुति दी। उन्होंने हेलो म्हारो सामलो रनू जे का राजा अजमालजी का कवरा माता मैंणा दे..गीत पर परफार्म कर माहौल को रोमांचित कर दिया। इस टीम को गंगा देवी ने लीड किया। इस दौरान पुरुष म्यूजिशियन ने ढोलक, मंजीरा और तंबूरा बजाया और महिला डांसरो ने यहां डांस किया। इस डांस को कई फेस्टिवल के दौरान परफार्म किया जा चुका है।
बारन जिले के चक्री लोकनृत्य ग्रुप ने सभी का दिल जीत लिया। इस मौके पर डांस महिलाओं ने किया और पुरुषों ने उनका साथ दिया। इसके साथ ही एक महिला सिंगर ने यहां गाना गाया। इस डांस को ज्यादातर शादियों और परिवारिक समारोह के दौरान किया जाता है।
बारन जिले के ही साहारिया स्वांग ग्रुप ने श्रीगोपाल धाणू के नेतृत्व में बेहतरीन अंदाज में नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य के दौरान कई डांसरों ने अपने शरीर को वाटर कलर्स से पेंट किया था। इस डांस को डांसर नवरात्र, होली और अन्य त्योहारों पर परफार्म करते हैं। इस नृत्य में एक पुरुष ने महिला का रूप लिया था जो कि भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को दर्शा रहा था।
तेरह तरह से बजे मंजीरे
गंगा देवी ग्रुप के सदस्यों ने यहां पर पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। तेरहताली नृत्य को गंगादेवी ग्रुप ने परफार्म किया। इसमें पैरंों में तेरह मंजीरे, मुंह में तलवार और सिर पर आरती थी। जिसके साथ इस ग्रुप ने पब्लिक का ध्यान आकर्षित किया।
देश विदेश में है धाक
कालबेलिया ग्रुप के सदस्यों ने बतया कि उनका ग्रुप देश विदेश में परफार्म कर चुका है। लंगा गायिकी राजस्थान की प्रसिद्ध गायिकी है। सुरमनाथ ने बताया कि वह तीस साल से इसी प्रोफेसन से जुड़े हैं और अब उनके बच्चे भी यही परफार्म कर रहे हैं।
सहारिया स्वांग ग्रुप की प्रस्तुति खास
सहारिया स्वांग नृत्य एक खास प्रकार का डांस है। बारा जिला से आए गोपाल धानुक ने बताया कि होली के समय सहरिया स्वांग किया जाता है। इसमें लड़कों के ऊपर पेंट किया जाता है और अलग अलग चित्र बनाए जाते हैं। इसमें भस्मासुर स्वांग और मां काली का स्वांग होता है।