चंडीगढ़। बरसात के साथ ही त्वचा संबंधी समस्या तेजी से बढ़ने लगी है। स्थिति यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में त्वचा संबंधी मरीजों की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा मरीज पैरों की उंगलियों में फंगल इंफेक्शन, खुजली, शरीर के फोल्ड वाले एरिया में चकत्ते, लालिमा और जलन वाले हैं। वहीं युवाओं में मुंहासे की शिकायत भी तेजी से बढ़ रही है। इससे बचाव के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ शरीर को सूखा रखने और डॉक्टर की सलाह से दवा लेने की सलाह दे रहे हैं। जीएमएसएच-16 के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जरा सी अनदेखी के कारण परेशानी बढ़ रही है इसलिए लोगों को खुद को सूखा रखने की सलाह दी जा रही है।
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पैरों का रखें विशेष ख्याल
नेशनल स्किन हॉस्पिटल के निदेशक व त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि बरसात में सबसे ज्यादा बैक्टिरियल संक्रमण पैरों में ही होता है। समस्या ज्यादा देर तक गीले पैर रहने वाले लोगों में है। उन्हें फंगल इंफेक्शन तेजी से हो रहा है। ऐसे लोगों के पैर के अंगूठे के नाखून पैरों की आसपास की त्वचा आसानी से संक्रमित हो जाती है। इसे नजरअंदाज करने पर समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि इसे ठीक होने में एक से दो साल तक का समय लग जाता है। इससे बचाव के लिए पैरों को सूखा रखें। डॉ. विकास का कहना है कि इससे बचाव के लिए यात्रा के दौरान हमेशा अपने पास एक अतिरिक्त जूते रखें, ताकि जूते गीले हो जाने पर उसे तत्काल बदला जा सके। वहीं ऑफिस में काम करने के दौरान जूते-जुराब उतारकर रख दें ताकि पैरो में हवा लगे और नमी सूख जाए। औषधीय पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए जूते की जगह चप्पल या खुले सैंडिल के प्रयोग के साथ ही पैरों को सूखा रखने को कहा जा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों में ये परेशानी ज्यादा है इसलिए अभिभावक इसे गंभीरता से लें।
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खुद के इलाज से बढ़ रहा मर्ज
आईएमए के सचिव व त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक मल्होत्रा का कहना है कि बरसात के दौरान धूप न होने से कपड़े ठीक से सूखते नहीं। ऐसे में उन कपड़ों पर उल्टी तरफ से प्रेस कर फिर उसको पहनें। इससे कपड़े की नमी पूरी तरह खत्म हो जाती है। गीले कपड़े पहनने की भूल न करें। डॉ. विवेक ने बताया कि बरसात के दौरान एलर्जी, खुजली, मुहांसे और त्वचा संबंधी अन्य परेशानी होने पर युवा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का प्रयोग करने लगते हैं। ऐसे में प्रयोग की जाने वाली स्टेरॉएड क्रीम परेशानी को ऊपरी स्तर पर तो जरूर कम कर देती है लेकिन अंदर ही अंदर समस्या और गंभीर होती जाती है। इसकी गंभीरता को देखते हुए इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मोटोलजिस्ट सरकार से इन दवाओं पर रोक लगाने का आग्रह कर रही है।
इनसेट
ताकि बरसात में भी त्वचा बैक्टिरिया मुक्त रहे
- पाउडर का इस्तेमाल करें ताकि नमी सोखी जा सके।
- बिना धुले कपड़े या मोजे न पहनें।
- स्पोर्ट्स शूज पहनते हों तो उन्हें वॉश जरूर करें।
- अपने कपड़ों और जूतों को साफ रखें।
- बारिश में भीग जाने पर घर आकर जरूर नहाएं।
- दूसरों के कपड़े व जूतों का इस्तेमाल करने से बचें।
- बारिश में ऐंटीबैक्टीरियल साबुन का उपयोग करें।
- साबुन मुक्त क्लीन्जर का उपयोग करें।
- एंटी-फंगल और सुगंधित साबुन से बचें।
- केवल हल्के लोशन आधारित मॉइस्चराइजर या सीरम का प्रयोग करें।
- भारी मेकअप से बचें। बहुत जरूरी हो तो 30 एसपीएफ़ के वाटरप्रूफ मेकअप और पानी प्रतिरोधी सनस्क्रीन का उपयोग करें।