लुधियाना से मुंबई के जवाहर लाल पोर्ट ट्रस्ट तक बीस फीट कंटेनर में 27 टन माल भेजने का फ्रेट करीब 42 हजार रुपये है। वही कंटेनर मुंबई पोर्ट से दुबई तक महज नौ हजार रुपये में पहुंच जाता है। इससे साफ है कि निर्यात कंटेनर का रेल भाड़ा देने में निर्यातकों को परेशानी हो रही है।
उनका एक ही सवाल है कि इन हालात में पंजाब से निर्यात किस तरह से बढ़ सकता है। निर्यातकों का अनुमान है कि सूबे से निर्यात में चालू साल के दौरान कोई खास ग्रोथ नहीं हुई होगी। प्रदेश का निर्यात पचास-साठ हजार करोड़ के आसपास ही मंडरा रहा है। इसमें से चालीस हजार करोड़ प्लस का निर्यात अकेले लुधियाना से ही हो रहा है।
निर्यात कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती राज्य पंजाब के निर्यातकों को राजस्थान और हरियाणा की तर्ज पर फ्रेट सब्सिडी देनी होगी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का तर्क है कि पंजाब में निर्यात के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की काफी कमी है। दूसरे यहां पर बिजली की दरें भी अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में उत्पादन लागत अधिक आ रही है। दूसरे पोर्ट से दूरी की मार सीधे निर्यातकों पर पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं, नतीजतन पेट्रोल एवं डीजल के रेट कम हो रहे हैं, लेकिन रेल के माल भाड़े में कोई कमी नहीं हुई है।