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निर्यातकों की उम्मीदें, इस बार होगी 'प्रभु' की कृपा

Thu, 26 Feb 2015 06:01 PM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, लुधियाना
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लुधियाना से मुंबई के जवाहर लाल पोर्ट ट्रस्ट तक बीस फीट कंटेनर में 27 टन माल भेजने का फ्रेट करीब 42 हजार रुपये है। वही कंटेनर मुंबई पोर्ट से दुबई तक महज नौ हजार रुपये में पहुंच जाता है। इससे साफ है कि निर्यात कंटेनर का रेल भाड़ा देने में निर्यातकों को परेशानी हो रही है।
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उनका एक ही सवाल है कि इन हालात में पंजाब से निर्यात किस तरह से बढ़ सकता है। निर्यातकों का अनुमान है कि सूबे से निर्यात में चालू साल के दौरान कोई खास ग्रोथ नहीं हुई होगी। प्रदेश का निर्यात पचास-साठ हजार करोड़ के आसपास ही मंडरा रहा है। इसमें से चालीस हजार करोड़ प्लस का निर्यात अकेले लुधियाना से ही हो रहा है।

निर्यात कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती राज्य पंजाब के निर्यातकों को राजस्थान और हरियाणा की तर्ज पर फ्रेट सब्सिडी देनी होगी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का तर्क है कि पंजाब में निर्यात के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की काफी कमी है। दूसरे यहां पर बिजली की दरें भी अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में उत्पादन लागत अधिक आ रही है। दूसरे पोर्ट से दूरी की मार सीधे निर्यातकों पर पड़ रही है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं, नतीजतन पेट्रोल एवं डीजल के रेट कम हो रहे हैं, लेकिन रेल के माल भाड़े में कोई कमी नहीं हुई है।
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मुंबई पोर्ट तक निर्यात कंटेनर पहुंचाने में काफी खर्च

लुधियाना से मुंबई पोर्ट तक निर्यात कंटेनर पहुंचाने में काफी खर्च हो रहा है। इसका सीधा असर उत्पादों की लागत पर आ रहा है। इसके अलावा उद्यमी यूरोपियन देशों के अलावा रूस की मंदी की मार भी झेल रहे हैं। ऐसे में पंजाब का निर्यात 50-60 हजार करोड़ पर ही स्थिर है।

रल्हन ने कहा कि निर्यातकों का कम से कम पच्चीस फीसदी वर्किंग केपिटल सरकार के पास विभिन्न रिफंड के रूप में फंसा है। निर्यातकों को न समय पर वैट रिफंड मिल रहा है और न ही सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी का सेनवेट। इसके अलावा दिसंबर के बाद से ड्यूटी ड्राबैक भी नहीं मिला है। निर्यातकों का सैकड़ों करोड़ रुपये का ड्राबैक कस्टम विभाग के पास अटका हुआ है। लिहाजा सरकार के पास अटकी वर्किंग केपिटल पर ब्याज की मार अलग से पड़ रही है।

रल्हन ने कहा कि मध्यप्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में निर्यातकों की शिपमेंट लागत केवल दो फीसदी है, जबकि पंजाब में यह तीन फीसदी से ज्यादा है। इसके अलावा राजस्थान एवं हरियाणा निर्यात को बढ़ाने के लिए फ्रेट सब्सिडी दे रहे हैं, पंजाब में ऐसा कुछ नहीं है। इन हालात में पंजाब से निर्यात को बूस्ट करना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार को निर्यात फ्रेंडली नीतियां बनानी होंगी।
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