रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बजट भाषण में रेलवे के माल भाड़े को 10 फीसदी तक बढ़ा दिया। इसका सबसे अधिक असर पंजाब पर पड़ेगा। विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने इसे वापस लेने की मांग की है।
बजट भाषण में रेलमंत्री ने रेलवे के माल भाड़े को रेशनलाइज करने की बात की, तो लोगों ने इसे हल्के में लिया, लेकिन बजट की बारीकियां समझते ही उद्यमी परेशान हो गए हैं।
जरूरी सामान की ढुलाई का माल भाड़ा दस फीसदी तक बढ़ा दिया गया। नतीजतन प्रभु की इस गुगली से उद्यमी और किसान सब परेशान हैं। उद्यमियों का तर्क है कि इससे महंगाई बढ़ने के साथ लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
बीते आठ माह में पेट्रो उत्पादों की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। डीजल के रेट में 14 रुपये तक की गिरावट आई है। माहिरों की मानें तो डीजल की कीमतें गिरने से रेलवे को 12 से 15 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। ऐसे में उद्योग जगत माल भाड़े में कमी की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन रेल मंत्री ने दाल, अनाज के माल भाड़े में दस फीसदी का इजाफा कर दिया।
वहीं यूरिया का फ्रेट भी दस फीसदी, स्टील का भाड़ा 0.8 फीसदी, एलपीजी गैस का भाड़ा 0.8 फीसदी, सीमेंट का भाड़ा 2.7 फीसदी, कोयले का भाड़ा 6.3 फीसदी, केरोसीन का भाड़ा 0.8 फीसदी, स्लैग का भाड़ा 2.7 फीसदी और स्क्रैप एवं पिग आयरन का भाड़ा 3.1 फीसदी महंगा कर दिया गया है।