अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर लड़ाकू विमान राफेल करीब एक सप्ताह तक अपनी ऑपरेशनल तैयारियों का अभ्यास करेंगे। इन्हें फ्रांस से अंबाला लेकर आए सभी जांबाज पायलट भी वेस्टर्न एयर कमांड के विभिन्न वायुसेना अड्डों पर इन विमानों के साथ एक्सरसाइज में जुट जाएंगे।
सूत्र बताते हैं कि वेस्टर्न एयर कमांड के सभी एयरफोर्स स्टेशन पर इन लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल एक्सरसाइज की जाएगी। इसके बाद इन विमानों को सुरक्षा के मद्देनजर सीमा पर तैनात कर दिया जाएगा। बताते चलें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ बिगड़े संबंधों के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है और इसी को देखते हुए एक की बजाय पांच राफेल भारत मंगवाए गए हैं।
अंबाला में है ब्रह्मोस की स्क्वाड्रन, इसलिए भी राफेल जरूरी
अंबाला में राफेल की तैनाती की एक और बड़ी वजह है। दरअसल, अंबाला में खतरनाक मिसाइल ब्रह्मोस की भी स्क्वाड्रन है। इसके अलावा इंडियन आर्मी की स्ट्राइक कोर खड़ग 2 कोर भी अंबाला में तैनात है। इसके साथ-साथ रॉकेट लांचर समेत आर्मी की अन्य मिसाइलों अति महत्वपूर्ण यूनिटें भी अंबाला में ही मौजूद है।
पंजाब-हरियाणा और हिमाचल का सब एरिया हेड क्वार्टर भी अंबाला में है। युद्ध के दौरान बॉर्डर पर तैनात जवानों को रसद, हथियार व अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी इसी हेडक्वार्टर की होती है। इसलिए वायुसेना और सेना की इन महत्वपूर्ण यूनिटों और स्क्वाड्रन की सुरक्षा के लिए भी अंबाला में राफेल जरूरी हैं।