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Chandigarh News: सेक्टर-48 अस्पताल में रेडिएशन सुरक्षा मानकों की अनदेखी

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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 के अंतर्गत संचालित सेक्टर-48 के अस्पताल में रेडिएशन से बचाव के तय मानकों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। यहां पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग निर्धारित शील्डेड (सुरक्षित) कमरे के बजाय खुले एरिया में किया जा रहा है जिससे मरीजों के साथ-साथ टेक्नीशियन और आसपास मौजूद लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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पोर्टेबल एक्स-रे मशीन एक सामान्य कमरे में रखी गई है, जहां न तो शीशा-युक्त दीवारें हैं और न ही रेडिएशन चेतावनी संकेत। कमरे में कुर्सियां, टेबल और कंप्यूटर सिस्टम मौजूद हैं। इससे पता चलता है कि यह नियमित एक्स-रे रूम के मानकों पर खरा नहीं उतरता। विशेषज्ञों के मुताबिक रेडियोलॉजिकल जांच के लिए विशेष शील्डिंग, सीमित प्रवेश और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होते हैं ताकि अनावश्यक रेडिएशन एक्सपोजर से बचा जा सके।
पोर्टेबल मशीन का उपयोग आमतौर पर आपात स्थिति या बेडसाइड जांच के लिए किया जाता है लेकिन खुले स्थान पर नियमित इस्तेमाल सुरक्षा नियमों के विपरीत है। टेक्नीशियन के लिए लीड एप्रन, थायरॉइड शील्ड और डोज मॉनिटर जैसे उपकरण जरूरी माने जाते हैं।
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पोर्टेबल मशीन को कहीं भी ले जाकर एक्स-रे किया जा सकता है। वैसे तो इसे एक्स-रे रूम में होना चाहिए, लेकिन मशीन को कहीं भी ले जाने की सुविधा होने के कारण हर बार मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पाता।
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प्रो जी पी थामी, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच 32
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