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Chandigarh News: पीयू में निलंबित एक्सईएन की जांच पूरी होने से पहले ही बहाली पर उठे सवाल

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। साउथ कैंपस में शोधार्थी ज्योति की संदिग्ध करंट लगने से हुई मौत के मामले में कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) अनिल कुमार और उप मंडल अभियंता (एसडीई) लखविंदर सिंह धनोआ को निलंबित कर दिया गया था। मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है। अब बड़ा सवाल यह है कि निलंबन के बाद भी संबंधित अधिकारी ने अपनी सेवाएं जारी रखीं और 4 अगस्त को एक विभागीय बैठक भी ली।
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28 जुलाई को हुई घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 29 जुलाई को दोनों अधिकारियों को निलंबित करने की घोषणा की थी, लेकिन निलंबन के बावजूद एक्सईएन कार्यालय में सक्रिय रहे और विभागीय कार्यों का संचालन करते रहे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि अधिकारी वास्तव में निलंबित थे, तो उन्हें प्रशासनिक बैठकों और कार्यों में शामिल होने की अनुमति किस आधार पर दी गई। मौत के बाद विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जांच लंबित है, दूसरी ओर निलंबित अधिकारी सेवाएं भी देते रहे और बाद में औपचारिक रूप से बहाल भी कर दिए गए।
पीयू कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष गौरव वीर सिंह सोहल ने कहा कि जब जांच पूरी ही नहीं हुई, तब अधिकारियों की बहाली करना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि इन अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं है, तो फिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
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बॉक्स: एसडीओ राजपाल सिंह की तैनाती को लेकर अलग विवाद
एसडीओ राजपाल सिंह पिछले कई वर्षों से अपनी तैनाती और चार्ज व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि मेंटेनेंस से जुड़ी संबंधित पोस्ट पर 1955 से अब तक सिविल इंजीनियर कार्य करते रहे हैं और नियमों के अनुसार वरिष्ठतम एसडीओ को ही चार्ज दिया जाना चाहिए। आरोप है कि पीयू में नियमों को दरकिनार कर अस्थायी व्यवस्था के नाम पर पिछले तीन वर्षों से एक ही व्यक्ति से यह कार्य कराया जा रहा है। राजपाल सिंह ने बीते आठ महीनों में अधिकारियों को 15 पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। विरोध के बाद छह सदस्यीय समिति बनाई गई, जिसकी पांच बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णय सामने नहीं आया।
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कोट...
इसको लेकर रजिस्ट्रार वाईपी वर्मा को फोन किया गया और मैसेज भी भेजा गया, उन्होंने मैसेज देखकर भी कोई जवाब नहीं दिया।
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