पंजाब यूनिवर्सिटी के हाउस अलाटमेंट की प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ही मकान दो लोगों को आवंटित करने के आरोप लगे हैं। हैरत तो यह है कि वीसी व डीयूआई ने जिस कर्मचारी को मकान आवंटित किया वही मकान ओपन काउंसिलिंग में दूसरे कर्मचारी को दे दिया गया। कर्मचारी नेता हरप्रीत सिंह ने एससी आयोग को शिकायत भेजी है। भेदभाव करने का आरोप लगाया।
साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया है। सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड नैनो टेकभनोलॉजी में क्लर्क एवं एससी, एसटी व ओबीसी कर्मचारी यूनियन के प्रधान हरप्रीत सिंह ने डीयूआई प्रो. शंकर झा से मेडिकल ग्राउंड पर ग्राउंड फ्लोर पर मकान आवंटित करने का आग्रह किया। इस पर कमेटी भी बनी और कमेटी ने उनके नाम पर आवास देने पर मुहर लगा दी।
टाइप थ्री 54 नंबर मकान आवंटित कर दिया। आरोप है कि इसी मकान को 6 जून को हुई ओपन काउंसिलिंग में शामिल कर लिया गया और एक अन्य कर्मचारियों को दे दिया गया। हरप्रीत सिंह ने कमेटी के सदस्यों व अन्य अधिकारियों के सामने भी मामला रखा, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। अब उन्होंने एससी आयोग में शिकायत की है। साथ ही वीसी को पत्र दिया है। हरप्रीत सिंह का कहना है कि जाति के आधार पर मकानों का आवंटन हो रहा है। वह हाईकोर्ट में इस मामले को ले जाएंगे।
आवास आवंटन पर फाइनल निर्णय लेने का अधिकार डीयूआई व वीसी के पास है, लेकिन पहले कमेटी की ओर से काउंसिलिंग की जाती है और उसी में आवास आवंटित होते हैं।
- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू