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Haryana: नूंह हिंसा के बाद इमारतों पर बुलडोजर चलाने के मामले में सरकार ने भेजे थे नोटिस, हाईकोर्ट में उठे सवाल

Thu, 14 Mar 2024 04:07 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया व जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन पर आधारित खंडपीठ ने नूंह में हिंसा के बाद निर्माणों को तोडने की कार्रवाई पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट मित्र एडवोकेट क्षितिज शर्मा ने कहा कि यह नोटिस विश्वास नहीं जगाते हैं।
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Nuh Violence - फोटो : फाइल
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विस्तार
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हरियाणा के नूंह क्षेत्र में सांप्रदायिक झड़पों के बाद हरियाणा सरकार द्वारा इमारतों को गैरकानूनी बताते हुए इन पर बुलडोजर चलाने के मामले में जारी किए गए नोटिसों पर सवाल उठ गए हैं। इस मामले में कोर्ट मित्र एडवोकेट क्षितिज शर्मा ने कहा कि यह नोटिस विश्वास नहीं जगाते हैं क्योंकि न तो इसमें मोहलत दिखाई गई है और न ही यह बताया गया कि इन्हें चस्पा किया गया या नहीं।
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बुधवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट के समक्ष गिराई गई इमारतों के मालिकों, कुछ वकीलों व अन्य लोगों की ओर से पक्ष बनने के लिए अर्जी दाखिल की गई। इन अर्जियों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 

इसके बाद इस मामले में कोर्ट मित्र नियुक्त एडवोकेट क्षितिज शर्मा ने बताया कि इस मामले में हरियाणा सरकार यह कह चुकी है कि अवैध निर्माणों को नोटिस देने के बाद तय प्रक्रिया के तहत गिराया गया है। सरकार की ओर से जो नोटिस कोर्ट में पेश किए गए हैं वह बिलकुल स्पष्ट नहीं हैं। नोटिसों में निर्माण गिराने के लिए दी गई मोहलत का जिक्र नहीं है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह निर्माण करने वालों को कैसे दिए गए। इन्हें निर्माण पर चस्पा किया गया था या नहीं, इस पर भी संशय की स्थिति है।
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हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया व जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन पर आधारित खंडपीठ ने नूंह में हिंसा के बाद निर्माणों को तोडने की कार्रवाई पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। बेंच ने पूछा था कि क्या तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और साथ ही दो हफ्तों में गिराए निर्माणों का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह भी सवाल उठता है कि क्या कानून व्यवस्था की समस्या की आड़ में समुदाय विशेष की इमारतों को तो नहीं गिराया जा रहा है और क्या यह जातीय सफाए की कवायद तो नहीं है।
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