चंडीगढ़। डड्डूमाजरा स्थित कचरा डंपिंग ग्राउंड को हटाने में हो रही लगातार देरी का मुद्दा एक बार फिर संसद में गूंजा है। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मामला उठाते हुए केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
मनीष तिवारी ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और संसद में बार-बार किए गए वादों के बावजूद डड्डूमाजरा डंप को हटाने की समयसीमा लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। पहले सरकार ने बायो-रिमेडिएशन का काम दिसंबर 2024 तक पूरा करने का भरोसा दिलाया था जिसे बाद में बढ़ाकर जुलाई 2025 कर दिया गया। सांसद ने कहा कि तारीख पर तारीख देने के अलावा जमीन पर ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही।
उन्होंने कहा कि भारी वित्तीय आवंटन और दो कचरे के ढेर साफ किए जाने के दावों के बावजूद आज भी डड्डूमाजरा में बड़ी मात्रा में पुराना कचरा बिना उपचार के पड़ा है। रोजाना नया कचरा डंप होने से स्थिति और गंभीर होती जा रही है जिससे आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर सीधा खतरा बना हुआ है।
सांसद ने यह भी कहा कि वर्ष 2004 से 2025 तक चंडीगढ़ में खासकर डड्डूमाजरा में कोई भी पूरी तरह कार्यशील वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित नहीं हो पाया। इस दौरान कई प्रस्ताव आए, लेकिन कचरे का पहाड़ घटने के बजाय लगातार बढ़ता गया। मनीष तिवारी ने सरकार से मांग की कि डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड को हटाने का काम तत्काल, समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए। साथ ही इसकी निगरानी और जवाबदेही तय की जाए तथा शहर में जल्द एक प्रभावी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में कचरे की समस्या स्थायी रूप से हल हो सके।