हाईटेक होती जा रही जिला अदालत ने इस महीने से एक और पहल की है। अब कोर्ट से भेजे जाने वाले समन पर क्यूआर कोड होगा। पिछले साल सभी कोर्ट में जहां वीडियो कान्फ्रेंसिंग के लिए एलसीडी समेत अन्य सेटअप लगाए गए थे और सभी कोर्ट रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
वहीं, इस बार अब जिला अदालत से भेजे जाने वाले समन में क्यूआर कोड होगा ताकि अगर किसी को समन किस केस में है या अन्य किसी तरह की जानकारी चाहिए तो वह क्यूआर कोड को स्कैन कर पूरी जानकारी हासिल कर सकता है। कंप्यूटर से बनने वाले सभी समन में क्यूआर कोड होने से इसकी सत्यता भी रहेगी।
इस महीने जून से क्यूआर कोड लगे समन जारी भी होने लगे हैं। जिला अदालत से किसी केस में किसी को गवाही के लिए बुलाना हो तो इसके लिए अदालत की ओर से व्यक्ति के नाम पर समन भेजे जाते हैं। अक्सर अदालत से आने वाले समन पर लोग घबरा जाते हैं और इसके लिए वकीलों से सलाह मशवरा लेने लगते हैं।
लेकिन, अब कोई समन आए तो घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि कोर्ट से जारी समन पर क्यूआर कोड होगा। उसे स्कैन करने पर किस केस में समन है, इसकी पूरी जानकारी आपको मोबाइल पर मिल सकेगी। इस पहल का सबसे अधिक फायदा यह है कि इससे समन की सत्यता भी प्रमाणित हो सकेगी। क्यूआर कोड को स्कैन करने पर अगर केस संबंधित कोई जानकारी नहीं मिलती तो समझ जाएं की वह फर्जी हो सकता है।
क्यूआर कोड होने से सबसे अधिक फायदा पुलिसकर्मियों को होगा। क्योंकि उन्हें अगर किसी न किसी केस में अदालत में गवाही देने आना पड़ता है। इतने केसों में गवाही होने के कारण वह अक्सर असमंजस में होते हैं कि यह समन किस केस में आया है। लेकिन, अब वह जैसे ही क्यूआर कोड स्कैन करेंगे तो उन्हें केस से जुड़ी सारी जानकारी उनके मोबाइल पर चंद सेकंड में मिल जाएगी।