पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) की पहली बैठक में ही नियमों की धज्जियां उड़ गईं। नियमत: पुटा की को-ऑप्ट कमेटी में कुल चार सीनेटरों को शामिल किया जाना चाहिए था, लेकिन यह संख्या पांच कर दी गई है। इसको लेकर फिर से घमासान शुरू हो गया है। पुटा के जुड़े शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पुटा के संविधान का ही पालन नहीं किया गया। डिस्कशन की बजाय सीधे चार सीनेटरों को को-ऑप्ट बना दिया गया, जो गलत है।
पुटा के संविधान के आर्टिकल- 16 के मुताबिक शिक्षकों की समस्याओं को सीनेट व सिंडिकेट में उठाने के लिए अधिकतम चार सीनेटरों को पुटा को-ऑप्ट कमेटी में शामिल किया जा सकता है। हाल ही में पुटा के चुनाव हुए और उसके बाद 25 अगस्त को पहली बैठक हुई। इस बैठक में चार सीनेटरों को को-ऑप्ट कमेटी में जगह दी गई है। इसमें प्रो. केशव मल्होत्रा, प्रो. नवदीप गोयल, डॉ. प्रवीण गोयल व प्रो. रजत संधीर शामिल हैं।
इनके नाम जैसे ही कमेटी में शामिल हुए तो कुल सीनेटरों की संख्या अब पांच हो गई। जानकारों का कहना है कि पुटा अध्यक्ष भी सीनेटर हैं। ऐसे में पांच सदस्य हो गए। पुटा के पूर्व अध्यक्ष व अन्य मेंबरों ने कहा है कि पुटा के संविधान का पालन हर हाल में हाना चाहिए था, लेकिन पुटा ही खुद नियम तोड़ेगी तो फिर कैसे काम चलेगा। इस बारे में पुटा अध्यक्ष से जानकारी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।