चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) की 23 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक शुक्रवार को हुई। इसमें सदस्यों ने तय किया कि जब तक 58 शिक्षकों के रिटायरमेंट के मामले में अदालत का निर्णय नहीं आता तब तक उन्हें एसोसिएशन का सदस्य माना जाएगा। 10 अक्तूबर को अदालत रिटायरमेंट के आदेश पर रोक लगा देती है या उन्हें फिर नौकरी दे देती है तो यह मसला अपने आप ही सुलझ जाएगा। शिक्षकों के खिलाफ फैसला गया तो जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर इस प्रकरण में निर्णय लेगी। वहीं, इसके बाद ही कमेटी के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
पुटा के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार ने बताया कि एग्जीक्यूटिव कमेटी के सामने तीन मसले थे। पहला शिक्षकों को 7वां पे कमीशन देने, दूसरा 58 शिक्षकों की सदस्यता को लेकर और तीसरा पुटा के सत्र 2022-2023 के चुनाव को लेकर फैसला करना था। दंत चिकित्सा संस्थान में पदोन्नति को लेकर कुलपति बोर्ड ऑफ फाइनेंस को पत्र लिखने जा रहे हैं। वहीं, 7वें पे कमीशन का मसला हल हो चुका है। इसे लेकर कमेटी ने पीयू प्रबंधन को बधाई दी। साथ ही पदोन्नति के मसले को जल्द से जल्द हल करवाने की मांग की। इसके बाद 58 शिक्षकों की सदस्यता को लेकर चर्चा की गई। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि वर्ष 2016 से पहले ऐसे मामलों में शिक्षकों को दोबारा नौकरी दी जाती थी। रिटायरमेंट के आदेश आने से पहले सभी 58 सदस्य पुटा की सदस्यता ले चुके थे और उन्होंने फीस जमा करा दी थी।
मुश्किल के समय नहीं छोड़ सकते हैं शिक्षकों का साथ
मृत्युंजय कुमार ने कहा कि पुटा शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बना है। इस स्थिति में उनका साथ कैसे छोड़ा जा सकता है इसलिए कमेटी ने 10 अक्तूबर तक अदालत का फैसला आने का इंतजार करने का निर्णय लिया। इसमें कोई निराकरण न होने पर जनरल बॉडी की बैठक में मामले को रखा जाएगा। पुटा चुनाव को लेकर तय किया गया कि जैसे ही 58 शिक्षकों की स्थिति तय होगी। इसके बाद चुनाव का निर्णय कर लिया जाएगा। अभी इन शिक्षकों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।