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पुटा की अंतिम वोटर लिस्ट जारी...600 से अधिक डालेंगे वोट, मृतक शिक्षकों के नाम हटाएं गए

Sat, 12 Sep 2020 01:04 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab University
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पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन यानी पुटा के चुनाव के लिए अंतिम वोटर लिस्ट जारी हो गई है। 600 से अधिक शिक्षक वोट डालेंगे। साथ ही इस सूची से मृतक शिक्षकों के नाम भी हटा दिए गए हैं। इसके अलावा 65 साल पार कर चुके शिक्षकों को भी सूची से अलग कर दिया है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद चुनाव की व्यवस्था देख रहे अधिकारियों ने सूची को संशोधित किया। पुटा के चुनाव 25 व 26 सितंबर को होने जा रहे हैं। इसकी तैयारियां चल रही हैं। चुनाव की व्यवस्था में लगे अधिकारियों ने तीन दिन पहले प्रारंभिक वोटर लिस्ट सभी शिक्षकों को भेजी थी।
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उसमें कहा गया था कि अपने अपने नाम व विभाग के नाम चेक कर लें और किसी को कोई आपत्ति हो तो दर्ज कराएं। नए वोटरों से भी शुल्क जमा करने के लिए कहा गया था। उसके लिए ऑनलाइन शुल्क जमा हुआ है। जैसे ही इस वोटर लिस्ट की जांच की गई तो पाया कि उसमें मृतक शिक्षक प्रो. शंकरजी झा, प्रो. संजय वाडवाल्कर के भी नाम शामिल कर दिए गए। यह सूची पिछले साल के वोटरों की थी, जिसके सीधा मेल से उठाया गया और शिक्षकों को भेज दिया गया। मृतक शिक्षकों के नाम सामने आने के बाद शिक्षकों में आक्रोश था। इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया और सच्चाई सामने लाई। की गई लापरवाही को दर्शाया गया।

नए वोटरों को सूची में दिया स्थान
अब पुटा का चुनाव कराने वाले अधिकारियों ने फाइनल वोटर लिस्ट तैयार की और उसमें एक-एक नाम की जांच की। मृतकों के नाम तो हटाए ही गए। इसके अलावा 65 साल पार कर चुके शिक्षकों को भी सूची से बाहर का रास्ता दिखाया गया। नए वोटरों को सूची में स्थान दिया गया। सूत्रों का कहना है कि सूची में लाइब्रेरी से जुड़े लोग भी हैं। कुछ का तबादला दूसरे विभागों में हो गया है लेकिन उनके विभाग नहीं बदले गए। हालांकि इसमें बाद में भी संशोधन हो सकेगा।
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गोयल ग्रुप पुटा चुनाव में नहीं दिखा रहा दिलचस्पी
पुुटा चुनाव के लिए पिछले साल तक जबर्दस्त माहौल रहा, लेकिन इस बार कम दिखाई दे रहा है। गोयल ग्रुप भी अपने पत्ते नहीं खोल रहा है जबकि सबसे पहले यही ग्रुप नामांकन आदि करने का काम करता था। सूत्रों का कहना है कि इस बार सीनेट का भरोसा नहीं है कि रहेगी या नहीं, क्योंकि पुटा का अध्यक्ष सीनेट का सदस्य बनता है। ऐसे में किसी ग्रुप से यदि पुटा अध्यक्ष बनता है तो उस एक वोट की ताकत सीनेट में दिखाई देती है। इस बार सीनेट के चुनाव होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

सूत्रों का कहना है कि इसी को देखते हुए कुछ ग्रुप रुचि कम ले रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पुटा में सेवा करनी पड़ती है और सीनेट में चुनकर जाने के बाद वहां पावर हो जाती है। हालांकि पुटा का चुनाव हर ग्रुप लड़ेगा। वोट भी देंगे, लेकिन रणनीति क्या होगी। यह तय नहीं हो पाया है। 13 सितंबर को नामांकन की आखिरी तिथि है। खालिद व सिद्धू ग्रुप अपनी पूरी टीम के साथ 13 सितंबर को नामांकन कराएंगे।
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