जीत के बाद पुष्पिंदर सिंह समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए।
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चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में हिंदुस्तान स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए) का डंका बजा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव तीनों पदों पर सोई के उम्मीदवारों को हराकर एचएसए ने क्लीन स्वीप किया। एचएसए के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पुष्पिंदर सिंह ने स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई) के तरनदीप सिंह को 282 वोटों से हरा दिया। नतीजों की घोषणा के साथ ही एचएसए के समर्थकों ने कॉलेज के बाहर जमकर जश्न मनाया। छात्रों ने कॉलेज के आसपास कार रैली निकाली और जमकर नारेबाजी की।
डीएवी में एचएसए और सोई के बीच ही मुकाबला रहा। प्रधान पद के लिए पुष्पिंदर सिंह को 2173 वोट मिले जबकि तरनदीप सिंह को 1891 वोट मिले। 54 छात्रों ने नोटा को चुना जबकि 81 के वोट रद्द हो गए। उपाध्यक्ष पद का चुनाव भी एचएसए के ही रूबल सिंह जीते। उन्हें 2105 वोट मिले जबकि सोई के विष्णु कुमार को 1897 मत मिले।
उपाध्यक्ष पद के चुनाव में 100 छात्रों ने नोटा का इस्तेमाल किया जबकि 97 वोट रद्द हो गए। सचिव पद पर भी एचएसए ने ही कब्जा जमाया। एचएसए के पारस को 2110 वोट मिले जबकि प्रतिद्वंद्वी सोई के तनवीर को 1900 वोट मिले। 107 छात्रों ने नोटा को चुना और 82 वोट रद्द हुए। डीएवी कॉलेज में 4199 मतदाताओं ने वोट डाला जबकि कुल मतदाताओं की संख्या 8427 थी। त्योहारी सीजन होने की वजह से कई छात्र घर जा चुके हैं इसलिए वोट प्रतिशत कम रहा।
एंट्री की लंबी लाइन देख कई छात्र मुड़े
डीएवी कॉलेज के बाहर सुबह 9 बजे ही कई छात्र एकत्रित हो गए। सुबह साढ़े 9 बजे छात्रों को एंट्री दी जाने लगी। गेट पर पुलिस, कॉलेज स्टाफ और बाउंसर्स छात्र-छात्राओं के आईडी कार्ड को देखने के बाद अंदर जाने की इजाजत दे रहे थे। इस वजह से थोड़ी ही देर में छात्रों की लाइन लग गई। देखते ही देखते साढ़े 10 बजे तक छात्रों की लाइन 100 मीटर से ज्यादा लंबी हो गई। ये हालात तब थे, जब एंट्री के लिए छात्रों की पांच लाइनें बनाई गई थी। लंबी लाइन को देख कर ही कई छात्र वापस चले गए।
कॉलेज के दोनों तरफ पुलिस ने की बैरिकेडिंग
लड़ाई-झगड़े की संभावना को देखते हुए डीएवी कॉलेज के दोनों तरफ इस बार भारी पुलिस बल तैनात रहा। 100-100 मीटर पर बैरिकेट लगाए गए थे। कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। छात्रों को वोट देने के लिए माउंट व्यू होटल या कॉलेज की पीछे ही वाहनों को खड़ा करने का विकल्प था। वहां से वोट देने के लिए पैदल जाना पड़ा। कॉलेज के ठीक सामने पुलिस ने अपना टेंट भी लगाया था। इसके अलावा पुलिस कर्मियों की तरफ से छात्रों को रोककर आईडी कार्ड भी चेक किया जा रहा था।