चंडीगढ़। पीजीआई की इमरजेंसी में सोमवार रात करीब 8 बजे महिला तीमारदार का महिला रेजिडेंट डाॅक्टर से झगड़ा हो गया। आरोप है कि तीमारदार ने महिला डाॅक्टर से धक्का-मुक्की की। इससे विवाद बढ़ गया और डॉक्टरों ने नए मरीजों का इलाज बंद कर इमरजेंसी में उनकी एंट्री बंद कर दी जिससे अफरा-तफरी मच गई। इमरजेंसी में इलाज नहीं मिलने से ट्राइसिटी के अलावा आसपास के राज्यों से आए मरीज इमरजेंसी के बाहर तड़पते रहे। रात 11.50 बजे तक डाॅक्टरों ने किसी नए मरीज को नहीं देखा और झगड़ा करने वाली तीमारदार पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल भी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। देर रात 11.50 बजे डाॅक्टरों ने महिला तीमारदार पर एफआईआर दर्ज करने के आश्वासन पर नए मरीजों को इमरजेंसी के अंदर आने दिया और इलाज शुरू किया। इसके बाद मरीजों ने राहत की सांस ली। खबर लिखे जाने तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की पुष्टि नहीं की थी। जानकारी के अनुसार, एक महिला पीजीआई में पिछले कुछ दिनों से अपनी भाभी का इलाज करा रही थी। सोमवार शाम करीब 8 बजे इलाज ठीक से न होने का आरोप लगाते हुए उसने हंगामा शुरू कर दिया। इसके साथ ही महिला फेसबुक पर लाइव होकर पीजीआई की व्यवस्था पर सवाल उठाने लगी। यह भी आरोप लगाया कि उसके मरीज को पीजीआई से निकाला जा रहा है। इस दाैरान एक रेजिडेंट डाॅक्टर से उसका झगड़ा हो गया। आरोप है कि महिला तीमारदार ने डाॅक्टर से धक्का-मुक्की की। इससे मामला गरमा गया और सभी रेजिडेंट डॉक्टर इकट्ठे हो गए और इलाज ठप कर दिया। पीजीआई दावा करता रहा कि जो मरीज पहले से भर्ती हैं, उन्हें इलाज मिल रहा है लेकिन अंदर भर्ती कई मरीजों ने कहा कि डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहे। इस बीच सभी डॉक्टर एक जगह इकट्ठे हो गए थे। मामले ने तूल पकड़ा तो पीजीआई के डायरेक्टर भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान रात करीब 10.15 बजे एक और मामले को लेकर पीजीआई के अंदर हंगामा हो गया। उसमें भी सभी डॉक्टर इकट्ठे हो गए। इससे पीजीआई में इलाज काफी प्रभावित हुआ। देर रात तक पीजीआई में मरीज इमरजेंसी के बाहर तड़पते रहे।
मरीज की माैत की बात कह विलाप करने लगा परिवार : पीजीआई में हंगामे के दाैरान लगभग चार घंटे इमरजेंसी में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। इमरजेंसी के मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने किसी को भी अंदर जाने नहीं दिया। इमरजेंसी के बाहर मरीजों की लाइन लग गई। मरीज स्ट्रेचर पर कराह रहे थे। कोई पंजाब से आया था को कोई कश्मीर से। किसी को ब्रेन हैमरेज था तो किसी की सिर में बड़ी चोट आई थी। इमरजेंसी के बावजूद किसी मरीज को अंदर नहीं जाने दिया गया। अंदर भी इलाज नहीं मिल पाने की वजह से कई मरीज वापस लौट गए। इमरजेंसी के बाहर पंजाब से आए जनक सिंह अचानक रोने लगे। उन्होंने बताया कि उनकी भतीजी की अंदर इलाज न मिलने से मौत हो गई। वह आखिरी सांसें ले रही थी लेकिन डॉक्टर ने उसे ऑक्सीजन नहीं दिया। पूरा परिवार विलाप करने लगा लेकिन थोड़ी देर बाद अंदर से सूचना आई की पेशेंट की मृत्यु नहीं हुई है बल्कि डॉक्टर बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
स्ट्रेचर पर कराहते रहे मरीज, निदेशक खुद की करते रहे तारीफ : पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल इमरजेंसी के अंदर डॉक्टरों से मिलने के बाद 11.20 बजे इमरजेंसी के गेट से बाहर निकले। गेट पर ही मरीज 8 बजे से लाइन लगाकर खड़े थे लेकिन मरीजों की हालत देखने के बजाय निदेशक आगे हरे रंग के शेड के पास पहुंचे और कहने लगे कि ये उन्होंने ही बनवाए हैं। मरीजों को अंदर नहीं जाने देने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी को भी रोका नहीं जा रहा है। हालांकि उनके यह कहने के करीब आधे घंटे बाद मरीजों को इमरजेंसी में जाने दिया गया।