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Chandigarh News: पीयू की आंबेडकर एसोसिएशन ने मांगों के लिए सौंपा ज्ञापन

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) ने विश्वविद्यालय प्रशासन को छह अलग-अलग ज्ञापन पीयू अथाॅरिटी को सौंपे। इनमें संस्थागत लापरवाही, नीतिगत भेदभाव और शैक्षणिक असमानता के गंभीर मुद्दे उठाए गए।
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यह ज्ञापन विशेष रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक समुदायों और शोधार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की बहाली के लिए प्रस्तुत किए।
पहले ज्ञापन में मेस व कैंटीन कर्मचारियों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की मांग की गई। एएसए सदस्यों ने कहा कि इन कर्मचारियों की स्वास्थ्य स्थिति का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के पोषण और स्वच्छता पर पड़ता है। विश्वविद्यालय का नैतिक दायित्व है कि वह इन श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित करे।
दूसरे ज्ञापन में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की तत्काल बहाली करने की मांग की गई। 2008 में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को विश्वविद्यालय अब तक लागू नहीं कर पाया है। इस योजना का लाभ सिख, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई, पारसी जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलना था। इस असंवेदनशीलता ने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित किया है।
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तीसरे ज्ञापन में एएसए ने पीएचडी फेलोशिप में श्रेणीवार मेरिट प्रणाली की बहाली की मांग की। पीएचडी फेलोशिप आबंटन की प्रक्रिया में केवल सामान्य मेरिट को ही आधार बनाना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए श्रेणीवार मेरिट सूची के आधार पर फेलोशिप का वितरण हो, ताकि समावेशी शोध वातावरण बन सके।
चौथे ज्ञापन ने यह मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय द्वारा अंतिम वर्ष के छात्रों से कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट फीस वसूलना अन्यायपूर्ण है, विशेषकर तब जब वही छात्र तुरंत विश्वविद्यालय में ही अगले कोर्स में दाखिला लेते हैं। यह शुल्क उस देरी के लिए लिया जाता है, जो स्वयं विश्वविद्यालय के अकादमिक प्रशासन की वजह से होती है, न कि छात्रों की।
पांचवें ज्ञापन में पीएचडी शोधार्थियों पर थोपे गए 24 घंटे उपस्थिति और अकादमिक निगरानी आदेश की वापसी की मांग उठाई गई। 4 अप्रैल 2025 को आरडीसी की ओर से जारी निर्देश में सभी पीएचडी शोधार्थियों को 24 घंटे अकादमिक रूप से सक्रिय रहने व नियमित उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है, यह अमानवीय और यूजीसी दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है। एएसए ने इसे तुरंत रद्द करने की मांग की है।
छठे ज्ञापन में माइग्रेशन फीस की दोहरी वसूली पर रोक लगाने और एक समान शुल्क नीति की मांग उठाई गई है। अन्य विश्वविद्यालयों से स्थानांतरित होकर आए शोधार्थियों से माइग्रेशन फीस दो बार वसूली जाती है।
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