कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में अवार्ड वापसी जारी है। पंजाबी साहित्यकार और कवि सुरजीत पातर भी किसानों के हक में उतर गए हैं। सोमवार को उन्होंने पद्मश्री अवॉर्ड वापस करने की घोषणा की है। उन्होंने साफ कहा कि जिस तरह किसानों के साथ केंद्र सरकार व्यवहार कर रही है, इससे वह आहत है। इसलिए वह अपने अवार्ड को वापस कर रहे हैं।
2012 में सुरजीत पातर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा पातर को 1979 में पंजाब साहित्य अकादमी अवार्ड, 1993 में साहित्य अकादमी अवार्ड, 1999 में पंचानंद पुरस्कार, 2007 में अनद काव्य सम्मान, 2009 में सरस्वती सम्मान और कविता के लिए गंगाधर नेशनल अवार्ड, 2014 में कुसुमाग्रज लिट्रेरी अवॉर्ड जैसे सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
कवि पातर ने पद्मश्री अवॉर्ड को वापस करने की घोषणा करते कहा कि जिस संवेदनहीनता और बेकद्री से केंद्र सरकार ने किसानों की सही मांगों और शांतिमय आंदोलन के साथ सलूक किया है, उससे मेरे दिल को ठेस पहुंची है। किसानों के दुख को गुमराह लोगों की समझ बताकर इस लहर को कमजोर करने की कोशिश की है। यह लोक भावना की तौहीन है। आहत मन के साथ मैं अपना पद्मश्री लौटाने का एलान करता हूं।
अम्मड़ी मैणू आखण लगी, तू धरती दा गीत रहेंगा
पद्म श्री होके वी पातर तू मेरा सुरजीत रहेंगा
पूर्व सरपंच ने की राष्ट्रपति पुरस्कार लौटाने की घोषणा
पंचायत की बढ़िया कार्यशैली के चलते राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित फिरोजपुर के गांव भोलूवाला के पूर्व सरपंच किसान जगदीप सिंह ने अपना पुरस्कार केंद्र सरकार को लौटाने की घोषणा की है। पूर्व सरपंच सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार किसान विरोधी कानून लागू कर रही है। इसके अलावा अन्नदाता के साथ खराब बर्ताव कर रही है, इस रोष के चलते वह अपना सम्मान केंद्र सरकार को लौटाएंगे।