एक ही मंच पर पंजाबी फिल्म उद्योग की तमाम बड़ी हस्तियां जमा थीं। पंजाबी फिल्मों के इतिहास और उसके सफर का उत्सव मनाने के लिए कलाकार पहुंचे। इस मौके पर पंजाबी सिनेमा के 85 साल के सफर, संघर्ष और मुकाम की जानकारी दी गई। साथ ही पहली राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ भी दिखाई गई।
नार्थ जोन फिल्म एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन ने पंजाबी सिनेमा दिवस के मौके पर चंडीगढ़ खरड़ हाईवे पर स्थित एक शॉपिंग मॉल में विशेष समारोह कराया। एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरप्रीत घुग्गी व महासचिव मलकीत सिंह रौणी ने एलान किया, अगले साल से तीन दिवसीय उत्सव का आयोजन हुआ करेगा, जिसमें दुनिया छोड़ चुके कलाकारों के परिवार भी शामिल होंगे। इस अवसर पर मनदीप सिंह सिद्धू का विशेष सम्मान किया, जिन्होंने इस दिवस की खोज की और लाहौर जाकर पंजाबी सिनेमा की शुरुआत की जानकारी को पुस्तक के रूप में सामने लाए। दिवंगत पंजाबी कलाकारों को दो मिनट का मौन धारण करके श्रद्धांजलि भी दी गई।
मनमोहन सिंह मन ने बताया कि ‘इश्के पंजाब’ पहली पंजाबी फिल्म थी, जो 1932 में बननी शुरू हुई व 29 मार्च 1935 को रिलीज हुई। पंजाबी फिल्मों की लोकप्रियता तब शिखर छू गई, जब 1960 में बनी पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके बाद बड़ी संख्या में पंजाबी फिल्में बनीं।
पंजाबी सिनेमा जगत ने देश-विदेश में पंजाब और पंजाबियत का झंडा बुलंद किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जिस रफ्तार से पंजाबी सिनेमा बढ़ रहा है, उसे देखते हुए उत्तर भारत में ‘विश्व स्तरीय फिल्म संस्थान की जरूरत महसूस हो रही है। अभिनेता एवं फिल्म निर्देशक गिप्पी गरेवाल ने कहा कि कई देशों में भी 29 मार्च का दिन पंजाबी सिनेमा दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है। यह पंजाबियों के लिए बड़े गर्व की बात है। उन्होंने केक काटने की रस्म भी अदा की।
यह हस्तियां भी हुईं शामिल
इस मौके एसोसिएशन के प्रमुख योगराज सिंह, निर्मल रिशी, चेयरमैन गुग्गू गिल्ल, जसवंत दमन, सिमरजीत, हरीश वर्मा, तरुण जुगपाल, सिकंदर भारती, रतन लाल औलख, हैरी भट्टी, सुरेश गिरी, मनजीत सिंह, जसविंद्र जस्सी, एस केसर, अमन चड्ढा, पाली भूपिंद्र, केवल सिंह, दर्शन औलख, पूनम गुरु, इकबाल गज्जण, पवनीत बिरगी, परमजीत पल्लू, राणा रणबीर, जेसिका, अश्वनी शर्मा मौजूद रहे।