मालेरकोटला के गांव टिब्बा के सिख परिवार की एक बेटी विभाजन के समय पाकिस्तान में रह गई थी। मालेरकोटला के मोहम्मद अशरफ ने बजरंगी भाईजान बन 18 सालों की जी तोड़ कोशिश के बाद भाई बहन को मिलवा दिया। साढ़े छह दशक के बाद रविवार को जब भाई-बहन मिले तो उनकी खुशी का पारावार नहीं रहा। हर कोई इसका श्रेय मालेरकोटला के गांव बदेशा निवासी मोहम्मद अशरफ को दे रहा है।
जानकारी के अनुसार अशरफ पाकिस्तान के शहर ननकाना साहिब जाते रहते हैं। साल 1998 में गुरु नानक देव जी के जन्म स्थल गुरुद्वारा ननकाना साहिब के द्वार पर भारत से आए श्रद्धालुओं से एक बुजुर्ग महिला पूछ रही थी कि बेटा तू मालेरकोटला के गांव टिब्बे से तो नहीं आया है। अशरफ के पूछने पर महिला ने बताया कि 1947 में विभाजन के समय वह सात आठ साल की उम्र में अपने ननिहाल पाकिस्तान में थी।
उसके मां-बाप मालेरकोटला के टिब्बा गांव में रहते थे। विभाजन की आग से पाकिस्तान स्थित उसका ननिहाल भी नहीं बच पाया। उसे होश नहीं कि कब उसे एक मुस्लिम परिवार ने सहारा दिया और ननकाना साहिब में ही शादी कर दी। बेशक अब उनका नाम शरीफा बानो है लेकिन वह अर्से से अपने भाई डोगर सिंह को ढूंढ रही हैं।