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-प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार अलग-अलग जिलों में लगाएगी सोलर पावर प्लांट, सालाना 390 एमयू बिजली पैदा होगी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब अब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा। पंजाब में बिजली की बढ़ती खपत और हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी से छुटकारा पाने के लिए सरकार का पूरा ध्यान सौर ऊर्जा पर केंद्रित है। प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार अलग-अलग जिलों में कुल 66 सोलर पावर प्लांट लगाने जा रही है।
इन 66 सोलर पावर प्लांट की कुल क्षमता 264 मेगावॉट होगी। प्रोजेक्ट की मदद से सालाना सरकार 390 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली पैदा करेगी। बता दें कि सरकार का बिजली सब्सिडी के रूप में फंड का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है। 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली की योजना को बिना रोके पंजाब की मौजूदा सरकार सब्सिडी के खर्च को नियंत्रित करने को लेकर प्लानिंग कर रही है। प्रोजेक्ट की पूरी रूपरेखा तैयार करने को लेकर बुधवार को सचिवालय में बैठक हुई। बैठक में पंजाब विकास आयोग की वाइस चेयरपर्सन सीमा बांसल, सचिव बिजली विभाग राहुल तिवारी, सचिव नई और नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत विभाग रवि भगत, पावरकाॅम के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर बलदेव सिंह सरां, पंजाब विकास कमिश्नर के मेंबर शौक रॉय, डायरेक्टर पेडा एमपी सिंह और दोनों विभागों के अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे।
इसके लिए सरकार ने सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए जोर देना शुरू कर दिया है। यहां तक की कुसुम योजना के तहत भी सरकार कई प्रोजेक्ट लेकर आएगी। कुसुम योजना में केंद्र सरकार की ओर से फंडिंग की जाती है। पंजाब के ऊर्जा स्रोत मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि रियायती ईंधन पर निर्भरता और बिजली सब्सिडी के बोझ को कम करने के अलावा पंजाब को साफ-सुथरी ऊर्जा के उत्पादन में अग्रणी सूबा बनाने के लिए राज्य सरकार चार मेगावाट क्षमता वाले 66 सौर ऊर्जा प्लांट (कुल 264 मेगावाट) स्थापित करने जा रही है।
प्रोजेक्ट से सालाना 136 करोड़ रुपये की होगी बचत
मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से सालाना 136 करोड़ रुपये की बचत होगी। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत फीडर स्तरीय सोलराइजेशन को लागू करने से यह बचत होगी। यह कदम राज्य में लगभग 1,056 करोड़ रुपये का निवेश लाएगा, जिससे गैर रियायती ऊर्जा क्षेत्र में कौशल एवं अपने हुनर को निखारने में लगे व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ- साथ राज्य की ग्रामीण आर्थिकता को भी बढ़ावा मिलेगा।