दिसंबर के मध्य में सर्दी चरम पर है। पिछले 10 दिन से मौसम ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार को तड़के से ही पठानकोट घने कोहरे की चपेट में आ गया। पूरा दिन पठानकोट पर धुंध की चादर ऐसे छाई कि 20 मीटर दूर से वाहन दिखाई नहीं दे रहा था।
सर्द हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। लोग दिन भर दुकानों और घरों में अलाव सेंकते नजर आए। वहीं धुंध के चलते पठानकोट के अधिकतर इलाकों में दिन भर बिजली के अघोषित कट लगते रहे। बिजली बंद रहने से न तो हीटर, गीजर चले और न ही पानी की सप्लाई मिली, जिससे लोग नाराज थे।
सुंदरचक्क-मलिकपुररोड पर पलटा ट्रक
मलिकपुर-सुंदरचक मार्ग पर गहरी धुंध के कारण ट्रक असंतुलित होकर पलट गया। ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को मामूली चोटें आई। वहीं रेत बजरी से भरा एक ट्रक गहरे गड्ढे में गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे पुल के दोनों ओर आने-जाने वाले ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं। पूरा दिन धुंध गहराने से छोटे-बड़े वाहन सड़कों पर रेंगते दिखाई दिए।
धुंध के कारण टला नए रेल इंजन का ट्रायल
मुंबई की परेल वर्कशॉप से पठानकोट लोको शेड पहुंचे नए डीजल इंजन का सोमवार को ट्रायल होना था। लेकिन भारी धुंध के चलते स्थगित कर दिया गया। परेल वर्कशॉप से आए इंजीनियरों ने बताया कि ट्रैक पर चढ़ाने से पहले इंजन का ट्रायल लिया जाता है। इंजन को ट्रैक पर चढ़ाने से पहले पांच दिन तक इसे पूरी तरह कंप्लीट किया गया ताकि ट्रायल के दौरान कोई दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के चलते ट्रायल स्थगित कर दिया गया है।
पंजाब के तमाम हिस्सों में दो दिन लगातार हुई बारिश को गेहूं और अन्य फसलों के लिए वरदान माना जा रहा है। इस समय बारिश से उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है। सूबे में दो दिन लगातार हल्की से मध्यम बारिश हुई। खेतीबाड़ी माहिरों के मुताबिक इस स्टेज पर ऐसी हल्की बारिश गेहूं की फसल के लिए काफी लाभदायक होती है।
इससे मिट्टी में नमी की मात्रा में सुधार होगा, जो कि इस समय फसल की बढ़त के लिए बहुत जरूरी था। खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर डॉ. स्वतंत्र ऐरी ने कहा कि पूरे पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। कहीं से भी ज्यादा बारिश या आंधी चलने की रिपोर्ट नहीं आई है।
इस समय गेहूं की फसल को बारिश की जरूरत थी। गेहूं का रकबा 35 लाख हेक्टेयर है और इस बार 170 लाख टन उत्पादन की उम्मीद है। पिछले दिनों गेहूं की फसल पर लाल सुंडी का हमला हो गया था। जिन किसानों ने पराली जलाए बगैर गेहूं की बिजाई की थी, उन्हीं की फसलों पर कीट का प्रभाव हुआ था।