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पीयू सिंडीकेट में हंगामे के साथ 15 प्रस्ताव पास

Mon, 20 Jul 2015 12:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में सिंडीकेट की बैठक में 15 प्रस्ताव पास कर दिए गए। जबकि कई पर जमकर हंगामा हुआ और उन्हें दोबारा चर्चा केलिए छोड़ दिया गया। साथ ही कुछ को रद्द कर दिया गया।
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बैठक में वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर पर सिंडीकेट की सदस्य महिला प्रोफेसर द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप का मामला काफी उछला। बहस के दौरान सदस्यों ने वीसी को घेरा। उनका कहना था कि वीसी मामले में आरोपी हैं, वे सिंडीकेट बैठक की अध्यक्षता भी कर रहें हैं। इसलिए इस मामले को एजेंडे में शामिल करना ठीक नहीं है।

वहीं महिला प्रोफेसर ने कहा कि उन्होंने केवल निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उन्हें न्याय मिलने की बजाए बदनामी मिल रही है। सिंडीकेट में फैसला लिया गया कि जब तक इस मामले में यूजीसी फंडिंग कमेटी का निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इस पर चर्चा नहीं होगी। महिला प्रोफेसर की मांग पर मामले से संबंधित डीवीडी को दस दिन में सौंपने पर वीसी ने हामी भर दी।
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रजिस्ट्रार को भी लिया आडे़ हाथ
सिंडीकेट के सदस्यों ने रजिस्ट्रार जीएस चड्ढा को भी आड़े-हाथों लिया। सिंडीकेट केकुछ सदस्यों ने रजिस्ट्रार पर जबरदस्ती नियम थोपने का आरोप लगाया। सीएसओ प्रो. जितेंद्र ग्रोवर ने भी इस्तीफे की वजह रजिस्ट्रार को ही बताया था।

प्रॉपर्टी राइट्स पॉलिसी एडाप्ट करने को मंजूरी
पीयू ने इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पॉलिसी को एडॉप्ट करने को सिंडीकेट ने मंजूरी दे दी है। अब पीयू की रिसर्च को पेटेंट कराने और ज्वाइंट रिसर्च के लिए रास्ता साफ  हो गया है। आईपीआर पॉलिसी नहीं होने से वैज्ञानिकों को यह क्लीयर नहीं था कि पेटेंट मिलने केबाद उसकी मार्केटिंग होने पर उनको कितना अधिकार मिलेगा।

कोई ज्वाइंट रिसर्च का पेटेंट होता है तो उसमें दोनों संस्थानों के कितने अधिकार रहेंगे और कमाई का बंटवारा कैसे होगा? पेटेंट्स और रिसर्च रजिस्ट्रेशन करवाना भी अब जरूरी कर दिया गया है। इससे विदेशों में पीयू की रिसर्च को कॉपी करना संभव नहीं होगा।
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