कोरोना के कारण पंजाब यूनिवर्सिटी का खजाना खाली है। इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020-21 के बजट में कैची चलाई है। सबसे बड़ी बात यह है कि छात्रावास के खर्चों में 40 फीसदी कटौती की गई है, लेकिन अफसरों की गाड़ियों में पेट्रोल लगातार डलता रहेगा। इसमें कटौती नहीं की गई। ये गाड़ियां कहीं आ-जा भी नहीं रही हैं।
यह पीयू में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि जब गाड़ियां एक ही जगह खड़ी हैं तो पेट्रोल का खर्च भी 70 फीसदी तक कम किया जाना चाहिए था ताकि पीयू के खजाने में लाखों रुपये बचते। इसके अलावा कर्मचारियों को भी ओवर टाइम नहीं मिलेगा और शिक्षक एलटीए का लाभ भी नहीं ले सकेंगे। पीयू प्रशासन ने कमेटी के इस निर्णय पर मुहर लगा दी है।
ये है बजट का गणित
पीयू का बजट हर साल 450 करोड़ रुपये से अधिक का बनता है। पिछले साल का बजट लगभग 486 करोड़ था। इस बार का बजट 470 करोड़ के आसपास रखने की योजना चल रही है। उसी को लेकर कमेटी बनाई गई ताकि खर्चों में कटौती की जा सके। इस कमेटी ने हर मुद्दे पर बात की, लेकिन उस विषय को छोड़ दिया जिस पर अफसरों का हक था। यानी जिन गाड़ियों में अफसर दौड़ते हैं उन गाड़ियों में अब रोज पेट्रोल नहीं डल रहा है। अधिकारी अपने घरों से काम कर रहे हैं।
न कहीं निरीक्षण के लिए जा रहे हैं और न किसी अन्य कार्यक्रम में। कार्यालय भी आना है तो उनके घर से उसकी दूरी महज एक से दो किमी ही है। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल के खर्च के नाम पर खेल कोई नया नहीं है। इसलिए इसके बजट पर कटौती नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि पीयू में 20 गाड़ियों के लिए पेट्रोल खर्च दिया जाता है। साथ ही रिपेयर का भी खर्च शामिल है। पीयू की दो से तीन बसें संचालित हैं। बाकी अधिकारियों की गाड़ियां चलती हैं। इन पर सालाना लगभग 42 लाख रुपये खर्च होता है।