पंजाब यूनिवर्सिटी की शान माने जाने वाले स्टूडेंट सेंटर के टॉप फ्लोर पर स्थित इंडिया कॉफी हाउस अब इतिहास बन जाएगा। बदलते समय के साथ खुद को उसके अनुरूप ढालने के बावजूद पीयू का इंडिया कॉफी हाउस भारी घाटे में चल रहा है। आखिरकार अब कैंटीन के मालिक ने इसे जुलाई महीने से बंद करने का फैसला कर लिया है।
इसके लिए उन्होंने पीयू प्रशासन के पास एप्लीकेशन भी दे दी है। इंडिया कॉफी हाउस के मालिक जॉय कुरुविला का कहना है कि पीयू प्रशासन लगातार उनकी अनदेखी कर रहा है। वह पिछले दो सालों से लगातार इंडिया कॉफी हाउस को घाटे से बाहर निकलने के लिए गुहार कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
कैंटीन का हर साल किराया बढ़ा दिया जाता है, लेकिन सामानों का रेट बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी जा रही। ऐसे में उनके लिए कैंटीन चलाना बेहद मुश्किल हो गया था, वह बंद नहीं करना चाहते हैं लेकिन कोई और चारा नहीं बचा है। जॉय कुरुविला केरल से ताल्लुकात रखते हैं और उनके अनुसार इंडिया कॉफी हाउस को बंद करने के बाद वह वापस केरल चले जाएंगे।
हालांकि सालों से चंडीगढ़ रहने के बाद अब उन्हें यहां काफी अपनापन महसूस होता है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ और केरल में काफी समानताएं हैं, यह शहर छोड़ना नहीं चाहते लेकिन घाटे में रह कर कैंटीन चला पाना अब संभव नही है।
नीचे खुली दुकानों की वजह से स्टूडेंट्स नहीं पहुंचते ऊपर
इंडिया कॉफी हाउस के घाटे में चलने का सबसे बड़ा कारण स्टूडेंट सेंटर के आसपास खुलीं दर्जनों दुकाने हैं। यह दुकानें साउथ इंडियन के अलावा चाइनीज, पंजाबी आदि भी डिश ऑफर करती हैं। इसकी वजह से स्टूडेंट्स का रुझान इंडिया कॉफी हाउस के प्रति काफी कम हो गया है। 13 जनवरी 2019 को वीसी प्रो. राजकुमार ने स्टूडेंट सेंटर का दौरा किया था।
स्टूडेंट सेंटर के नीचे संचालित दुकानें देख उन्होंने भी हैरत जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि सेंटर ऐसे चला तो यह हेरिटेज नहीं बन पाएगा। भवन में कमर्शियल गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए कि संचालित दुकानों को अन्य जगह स्थापित किया जाए। इस पर भी अभी तक कुछ होता नहीं दिखाई दे रहा है।
कभी यही कैंटीन कहलाती थी स्टूडेंट सेंटर, अब मतलब ही बदला
इंडिया कॉफी हाउस के मालिक जॉय कुरुविला ने बताया कि सालों पहले यहीं कैंटीन स्टूडेंट्स का सेंटर होती थी। नीचे कोई दुकान नहीं थी। डिपार्टमेंट्स में भी कम ही कैंटीन होती थी, जिसकी वजह से सभी स्टूडेंट, फैकल्टी स्टॉफ आदि यही बैठकर चाय, काफी व खाने का आनंद लेते थे। लेकिन समय के साथ नीचे दर्जनों दुकानें खुल गईं। स्टूडेंट्स वहीं जमा होने लगे और अब नए स्टूडेंट्स उसी जगह को स्टूडेंट सेंटर के नाम से पहचानने लगे हैं।
लगता था कभी परिवारों का जमावड़ा, अब सब सूना
इंडिया कॉफी हाउस में कभी परिवार संग आए लोगों की भीड़ रहती थी, लेकिन जैसे-जैसे नीचे दुकानें खुलती गईं, लोगों की रुचि इंडिया कॉफी हाउस की तरफ कम होने लगी। अब हालात यह है कि नाममात्र परिवार ही स्टूडेंट सेंटर के टॉप फ्लोर पर इंडिया कॉफी हाउस में जाते हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण आसपास पार्किंग की उचित व्यवस्था का नहीं होना भी है।
साउथ इंडियन डिश के मशहूर इंडिया कॉफी हाउस
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का स्टूडेंट सेंटर अपनी खूबसूरती के लिए देशभर में मशहूर है। यह अपनी बनावट समेत कई खूबियां अपने में समेटा हुआ है। काफी सालों पहले केरल के जॉय कुरुविला ने स्टूडेंट सेंटर के टॉप फ्लोर पर इंडिया कॉफी हाउस की शुरुआत की। कैंटीन में साउथ इंडियन की सारी डिश काफी कम दामों पर आज भी मिलता है।
इंडिया कॉफी हाउस में दूर दूर से लोग कॉफी और इटली-डोसा के लिए आते थे, लेकिन समय से साथ धीरे-धीरे लोगों का आना कम हो गया। पीयू छात्रसंघ चुनावों के समय सभी पार्टियों की मीटिंग्स भी इंडिया कॉफी हाउस में ही आयोजित की जाती हैं, इसके अलावा पीयू में पढ़ रहे और यहां से पढ़ाई कर चुके छात्रों की इंडिया कॉफी हाउस से काफी यादें जुड़ी हैं।
बिकने की खबर के बाद खरीदारों की लगी लाइन
इंडिया कॉफी हाउस के मालिक ने बताया कि जब से उन्होंने कैंटीन छोड़नेे का फैसला किया और इसे रेंट पर लेने वाले लोगों की लाइन लग गई है। रोजाना कई लोग उनसे कैंटीन से संबंधित जानकारी लेने पहुंच जाते है। इसके पीछे उन्होंने स्टूडेंट सेंटर की अपनी पहचान और स्टूडेंट्स में इसके प्रति क्रेज को बताया।
स्टूडेंट सेंटर की अपनी अलग पहचान
आजादी के बाद फ्रेंच आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए ने 1960 में पीयू में स्टूडेंट सेंटर की स्थापना कराई। पीयू का स्टूडेंट सेंटर अपने में अलग है। पीयू की पहचान ही इसके जरिये होती है। चाहे इंटरनेट हो या फिर कागजों में फोटो, इसी के जरिये लोग पीयू को पहचानते हैं। यह भवन 60 साल पुराना है। इस सेंटर के नीचे साइकिल स्टैंड होता था।
चारों ओर से यह खुला हुआ था। नीचे से लोग भी आसानी से निकल सकते थे। पिलर पर यह भवन खड़ा था लेकिन लगभग 15 साल पहले इसका नक्शा ही बदल दिया गया। पार्किंग को खत्म कर दिया गया। चारों ओर से कवर्ड कर दिया गया। इसमें एटीएम, कॉफी हाउस, खाना खजाने की दुकानें आदि खोल दी गईं।