पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने अब हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर पीयू को प्रशासनिक संकट से उबारने के लिए गवर्नेंस रिफॉर्म्स की मांग की है। प्रो. ग्रोवर ने अर्जी में कहा है कि पीयू का वित्तीय संकट काफी हद तक हल हो चुका है लेकिन अभी गवर्नेंस रिफॉर्म्स की जरूरत है। ऐसे में उनके वीसी न रहने पर भी उन्हें इस केस से जुड़े रहने दिया जाए और गवर्नेंस रिफॉर्म्स पर सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा जाए। कोर्ट ने उनकी अर्जी पर पीयू सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है।
वीसी ने पीयू की सीनेट और सिंडिकेट पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों बॉडी में मौजूद कुछ सदस्यों के कारण पीयू का माहौल बिगड़ रहा है। पीयू के गवर्नेंस रिफॉर्म्स को लेकर उन्होंने पिछली सुनवाई पर हलफनामा देकर दोनों बॉडी के सदस्यों पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस हलफनामे को लेकर सीनेट और सिंडिकेट में काफी बवाल भी मचा था। विवाद इतना बढ़ गया था कि सीनेट और सिंडिकेट ने वीसी की शक्तियां तक खत्म करने की कोशिश कीं। इस सबके बावजूद वीसी हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे को वापस लेने को तैयार नहीं हुए।
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने पिछली सुनवाई पर एक अर्जी दायर कर वीसी के हलफनामे को वापस लिए जाने की मांग की थी। अब ग्रोवर ने अर्जी देकर कहा है कि पीयू के सामने सबसे अहम सवाल गवर्नेंस रिफॉर्म्स का है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी 4 जुलाई को हुई सुनवाई में पीयू के अन्य मुद्दों सहित गवर्नेंस रिफॉर्म्स पर भी आगे सुनवाई की इजाजत दी है। लिहाजा बेहतर होगा कि उन्हें आगे भी हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले में सुना जाए। पिछली सुनवाई पर वीसी ने कहा था कि यूनिवर्सिटी बिना शिक्षकों के कुछ भी नहीं है।
लेकिन अब यूनिवर्सिटी उन लोगों द्वारा चलाई जा रही है जिनका पीयू से कुछ लेना-देना ही नहीं है। केंद्र सरकार कि ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा था कि इस मामले में पहले केंद्र और पंजाब सरकार का पक्ष जरूर पूछा जाना चाहिए।