मंत्रिमंडल ने आबकारी एक्ट में संशोधन कर नकली शराब तैयार करने और बेचने वाले व्यक्ति से पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था भी की है।
धारा 61 -ए (2) (ब) के अनुसार, यदि अदालत को लगता है कि व्यक्ति की मौत या गंभीर हालत किसी जगह बेची गई शराब के सेवन के साथ हुई है तो शराब के निर्माता और विक्रेता की तरफ से मुआवजे के तौर पर प्रत्येक मृतक के कानूनी वारिसों को कम से कम पांच लाख रुपये, गंभीर नुकसान के मामले में कम से कम तीन लाख रुपये या अन्य नुकसान के मामले में पीड़ित को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दे सकती है।
इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि उसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है या नहीं। यह व्यवस्था भी की गई है कि जहां शराब एक लाइसेंसशुदा ठेके से बेची जाती है तो इसके अंतर्गत मुआवजा देने की जिम्मेदारी लाइसेंस धारक व्यक्ति की होगी। जब तक इस धारा के अधीन अदालत में अदा योग्य रकम का भुगतान नहीं हो जाता, दोषी द्वारा कोई अपील दायर नहीं की जा सकेगी।
शराब के अवैध आयात-निर्यात पर भी कसा शिकंजा
स्पिरीट की नेचर में किसी तरह की तबदीली या तबदीली की कोशिश के अपराध के लिए एक्ट की धाराओं में कैद की मियाद एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने और जुर्माने की राशि 1000 रुपये से 10,000 करने के लिए धारा 63 में भी संशोधन किया गया है। इसी तरह मंत्रिमंडल ने किसी नशीले पदार्थ के गैरकानूनी आयात, निर्यात, यातायात, निर्माण, कब्जे आदि के लिए कैद की मियाद तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने के लिए धारा 61 (1) में संशोधन करने की भी मंजूरी दी है।
विदेशी शराब की सीमा 90 बल्क लीटर से 27 बल्क लीटर तक कर दी गई है। अब से कोई भी व्यक्ति बिना ड्यूटी अदा किए गैरकानूनी ढंग से 90 बल्क लीटर से अधिक किसी भी विदेशी शराब आयात, निर्यात या ढुलाई करता है तो उसे कम से कम दो साल की कैद और कम से कम दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।