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11 साल की बेटी और माता-पिता की जिम्मेदारी उठाई, साथ में लड़ी कोरोना से लड़ाई

Fri, 01 Jan 2021 01:49 PM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
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डॉ. पामी चतरथ। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के ढकोली स्वास्थ्य केंद्र की एसएमओ डॉ. पामी चतरथ का जज्बा कोरोना काल में कभी नहीं डिगा। अपनी 11 साल की बेटी को नौकरानी के भरोसे छोड़कर वे दिन रात मरीजों की सेवा में डटी रही। डॉ. चतरथ ने बताया कि वह चंडीगढ़ में रहती हैं और रोजाना कार चलाकर ढकोली अस्पताल पहुंचती हैं। कोरोना काल से ही वह अपनी 11 वर्षीय बेटी के साथ घर में अकेली रहती हैं। उनके पति सऊदी अरब में बिजनेस करते हैं और वहीं रहते हैं। 

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बेटी को नौकरानी के सहारे छोड़कर उन्होंने कर्त्तव्य का पालन किया। उनके पास एक और जिम्मेदारी थी, बुजुर्ग माता पिता की। वे मनीमाजरा के मनसा देवी कांप्लेक्स में रहते हैं। उनके भाई आर्मी में हैं और माता-पिता अकेले यहां रहते हैं। कोरोना काल में सबके सहयोग से इस जिम्मेदारी को निभा पाई। 

जब-जब घबराई बेटी ने हौसला बढ़ाया
कई बार घबरा जाती थी, उस समय मेरी 11 साल की बेटी ने मेरा हौसला बढ़ाया। क्योंकि अस्पताल से घर आने के बाद अस्पताल के कपड़े बदलने और नहाकर बच्चे के पास जाना और फिर नौकरानी को उसके घर तक छोड़कर आना, यह बहुत कठिन घड़ी थी। 
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बार-बार मेरी बेटी कहती थी- मां अपना ख्याल रखिए। धीरे-धीरे सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा। मैं अपने आपको संभाल लूंगी। 11 साल की बच्ची के मुंह से ये बात सुनकर हौसला अपने आप बढ़ जाता था और रोजाना अपनी जिम्मेदारियों को निभाने अस्पताल सही समय पर पहुंच जाती थी। 

मरीज को अस्पताल के बाहर छोड़कर गायब हो जाते थे लोग 
डॉक्टर ने चतरथ ने बताया कि कोरोना काल में कई बार ऐसा समय भी आया जब लोग कोरोना के मरीज को अस्पताल के बाहर ही छोड़कर भाग जाते थे। वह समय उनके लिए बहुत डरावना और भावुकता वाला था। आज भी उस दृश्य को याद करके वह डर जाती हैं।

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