पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने करीब 48 साल बाद अपने पास फार्मूले में बदलाव किया है। इस साल गत वर्षों की तरह ग्रेस अंक विद्यार्थियों को नहीं दिए गए हैं। यह पहला मौका है जब यह कार्रवाई बोर्ड ने की है। यह जानकारी बोर्ड के चेयरमैन बलबीर सिंह ढोल ने दी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में सभी बोर्डों के चेयरमैनों की मीटिंग हुई थी, जिसमें तय हुआ था कि इस बार बोर्ड ग्रेस अंक नहीं दिए जाएंगे।
बाकायदा मार्क्स मॉडरेशन पालिसी तैयार की गई थी। इसकी नोटिफिकेशन 10 मई को हुई। इसके बाद देश में पंजाब पहला बोर्ड बन गया है, जिसने यह पॉलिसी अपनाई है। सीबीएसई समेत अन्य बोर्ड भी आने वाले 10 में इस पॉलिसी को अपनाएंगे।
बोर्ड के चेयरमैन बलबीर सिंह ढोल ने बताया 1969 के बाद यह पहला मौका है जब ग्रेस अंक नहीं दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रेस अंक विद्यार्थियों को दिए जाने से एक तो बोर्ड के रिजल्ट का स्तर भी बढ़ जाता है। दूसरा विद्यार्थियों के साथ भी खिलवाड़ होता है। वह ऐसे में गलत स्ट्रीम चुन लेता है। बाद में उसे इसके लिए ही पछतावा करना पड़ता है।